खास खबर/लोकल खबरशेखपुरासमाजसेवा

ख़ुदा के दिल को भी सुकून आता होगा,जब कोई ग़रीब चेहरा मुस्कुराता होगा,जब बेटियों की सजती होंगी डोलियाँ, बाप के आंखों में खुशियों का समंदर छलक जाता होगा।

ग़रीबी शब्द ही इंसान को परिस्थितियों से संघर्ष करने के लिए मजबूत बना देता है। लेकिन जब बेटियों के हाथ पीले करने का वक्त आता है तो कमज़ोर बना देता है। बेटियां जब बड़ी होती है तो जल्द से जल्द हाथ पीले हो जाए हर ग़रीब बाप की यही सपना होता है।लेकिन दहेज़ और सामाजिक ताना बाना के आगे मजबूर बाप अमीरों के चौखट पर हाथ फैलाता है,ऐसी स्थिति में जब कोई इंसान आगे बढ़कर गरीब बेटियों की डोली सजाने के लिए हाथ आगे बढ़ाए तो उसकी प्रशंसा करना लाज़िमी है। जी यह एक सत्य घटना पर आधारित खबर है। शेखपुरा सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत हथियाँवा गांव के चितरंजन सिंह के दरबाजे पर ग़रीब बाप अपनी बेटियों के हाथ पीले करने के लिए आर्थिक सहयोग के लिए जमावड़ा लगाए रहते हैं और चितरंजन सभी को आर्थिक मदद कर खुशी खुशी बिदा करते हैं।

चितरंजन सिंह के इस जज़्बे को सलाम है। जो ग़रीबी के दर्द को महसूस करते हुए कई बर्षो से आर्थिक मदद कर रहे हैं। शेखपुरा जिला सहित आसपास पड़ोस जिले के लोग भी आने लगे हैं और चितरंजन किसी को भी खाली हाथ नही जाने देते हैं। शेखपुरा जिले के शहरी या ग्रमीण क्षेत्र का किसी भी जाति या धर्म की बेटी हो शादी में मदद करते हैं। सिर्फ शादी होने का कोई साक्ष्य लेकर आइए और सहयोग राशि लेते जाइए। चितरंजन सिंह ने कहा कि जब किसी गरीब की बेटी की शादी में सहयोग करते है तो बड़ा सुकून मिलता है।

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