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समय से पहले मानसून आने के कारण किसानों के चेहरे पर खुशी भी और मायूसी भी, जानें क्यों?

Sheikhpura: इस बार मॉनसून समय से पहले ही आ गया है। जिसके कारण लोगों को जेठ की तपिश के बदले सावन की फुहार देखने को मिला है। जून माह में लक्ष्य से अधिक बारिश हुई है। एक तरफ इसका लाभ भी किसानों को मिला है, वहीं कुछ किसानों को इससे नुकसान भी उठाना पड़ा है। बरबीघा कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रखण्ड में 7653.74 हेक्टेयर भूमि खेती के लायक है। जिसमें लगभग 4962 हेक्टेयर (पिछले साल के मुताबिक) में धान की रोपनी होती है।

यहाँ अब तक किसानों के द्वारा 30-35 फीसदी धान के बिचड़े डाल दिए गए हैं। जबकि अधिक बारिश की बजह से लगभग 5 फीसदी धान के बिचड़े गलने की सूचना भी मिली है। जिन किसानों ने बारिश से पहले इस बार निचले स्तर के खेतों में धान का बिचड़ा लगाया था। अधिक पानी भर जाने से उन किसानों के धान के बिचड़े गल गए हैं। तेउस, पांक, पिंजड़ी, कुटौत पंचायत के अलावे नगर परिषद के कई किसानों ने बताया कि प्रत्येक साल पटवन कम करने के उद्देश्य से जो जमीन सबसे नीचा होता था। उसी में धान का बिचड़ा डाला जाता है। इस बार भी धान का बिचड़ा उसी खेत में डाला गया था। लेकिन अधिक बारिश होने के कारण धान का बिचड़ा खराब हो गया है।

इस संबन्ध में किसान सलाहकार महेश मल्लिक ने बताया कि वरीय पदाधिकारी के निर्देशानुसार ऐसे किसानों का आंकलन कर अन्य योजनाओं के तहत उन्हें फिर से बीज वितरण किया जाएगा, ताकि उन्हें खेतों में दुबारा बीज डालने में कोई परेशानी न हो। वहीं प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी सह निरीक्षी पदाधिकारी बिनोद दास ने बताया कि प्रखण्ड में पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध है। ऐसे सभी किसान दूसरी योजनाओं के तहत या अपने परिवार के अन्य सदस्यों के किसान पंजीकरण के माध्यम से अनुदानित दर पर फिर से बीज खरीद कर लाभ ले सकते हैं।

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