जरा हट केजानकारीशेखपुरा

ट्रेनिंग के दौरान जख्मी होकर छोड़ना पड़ा था NDA, वर्दी से इतनी मोहब्बत थी कि बन गए दारोगा

Sheikhpura: बिहार की मिट्टी ने कई लाल जन्म दिए हैं, खासकर मगही माटी ने। ऐसे ही एक माटी के लाल ने आज साबित कर दिया कि जुनून हो तो कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। जरूरत है तो बस इस हौसले और जुनून को बनाये रखने की। बिहार पुलिस में दरोगा के पद पर चुने गए ऐसे ही एक युवा से आपका परिचय कराते हैं।

शेखोपुरसराय प्रखण्ड के नीमी गांव निवासी फौजी बबलू सिंह (फौज के हवलदार से रिटायर्ड) और रूबी देवी के घर में 15 जून 1998 को गुलशन आनंद का जन्म हुआ। फौजी के घर में बचपन बीता, सो वर्दी से लगाव हो गया। बड़े होने पर पढ़ाई भी पुणे के आर्मी स्कूल में हुई, सो लगाव बढ़ता चला गया। बाद में दिल्ली में रहकर आगे की पढ़ाई वहीं से पूरी की और नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर सेलेक्शन भी हो गया। इन्होंने अपने साथ अपने माँ-बाप का सपना भी साकार किया।

गुलशन के माता-पिता

मगही न्यूज से बात करते हुए उन्होंने आगे बताया कि 2017 में सेलेक्शन के बाद पुणे से 17 किलोमीटर दूर खड़गवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी के ट्रेनिंग कैम्प में ट्रेंनिग के दौरान हुए एक हादसे में इनका पैर बुरी तरह जख्मी हो गया। इलाज के बाद पैर तो ठीक हो गया, पर NDA छूट गया। इन्होंने तब भी अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। परिवार ने भी हिम्मत बढ़ाया। फिर जुट गए जी-जान से। देश न सही राज्य की सेवा का सपना लिए 2019 में अयोजित दारोगा भर्ती परीक्षा में शामिल हुए और पहली ही बार में लिखित परीक्षा कम्प्लीट कर गए। उन्होंने बताया कि NDA के लिये की गई तैयारी यहां भी काम आ गई। हालांकि कोरोना के कारण फिजिकल टेस्ट में देरी होने के कारण रिजल्ट के लिये थोड़ा इंतजार करना पड़ा। पर आखिरकार वर्दी से हुई मोहब्बत को इन्होंने फिर से जिंदा कर दिया। फौज वर्दी न सही, खाकी ही सही। मगही न्यूज इस परीक्षा में सफल सभी अभ्यर्थियों के उत्तम भविष्य की कामना करता है।

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