नवादा

नई पीढ़ी के दर्जनभर कवियों ने आज जुटान की ओर से आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में उपर्युक्त गर्जना के साथ किया कविता पाठ

नवादा : जनता स्वयं राज सत्ता का विपक्ष है और जनता सड़क से संसद तक अपनी आवाज पहुंचाने का मादा रखती है। नई पीढ़ी के दर्जनभर कवियों ने आज जुटान की ओर से आयोजित ऑनलाइन कवि सम्मेलन में उपर्युक्त गर्जना के साथ कविता पाठ शुरू किया। अध्यक्षता यूपी के कवि प्रेमचंद दुबे ने की जबकि संचालन कृष्णकुमार भट्टा ने किया। मगही, हिंदी और भोजपुरी भाषा में नवोदित कवियों ने नई पीढ़ी की चेतना से अवगत कराते हुए वर्तमान व्यवस्था की त्रुटियों पर दृष्टि डाली तो प्राकृतिक कहर कोरोना महामारी समेत बाढ़, सुखाड़, आंधी तूफान को भी चेतावनी दे डाला। सावन की फुहार को पंक्तियों में समेट कर कवियों ने किसानों के श्रमसाधना को नमन किया।

“जात धर्म और देश से उठकर मानव जब कदम बढ़ा देगा” के माध्यम से चंद्रभूषण सरस ने मानवता का पाठ पढ़ाया तो माँ की ममता को संवेदना के स्वर से रूपेश ने सजाया। गौतम सरगम ने “हमर अंखिया के तारा हमरे अखिया देखावे” कह कर माँ बाप की पीड़ा का बखान किया। कृष्णकुमार भट्टा ने मोबाइल के उपयोग और दुरूपयोग को शब्दों से सजाया तो प्रेमी आनंद ने नेताओं के बहशीपन से रूबरू कराया। नवलेश कुमार और शम्भू विश्वकर्मा ने नई धारा की कविता को हथियार की तरह इस्तेमाल किया। अध्यक्षता करते हुए प्रेमचन्द दुबे ने मगही, भोजपुरी को सगी बहन की तरह पेश करते हुए “चलो रोपे चली अब धान” कविता का पाठ किया। अशोक समदर्शी ने जुटान के ऑनलाइन कवि सम्मेलन की यथार्थता को शब्द दिया। अंत में अध्यक्ष प्रेमचंद दुबे ने सभी नवोदित कवियों की कविताओं को वर्तमान समय के लिए सराहनीय और प्रासंगिक बताया। इसके अलावे वॉइस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ कवि रामचंद्र सिंह, दीनबंधु, परमानन्द सिंह, मिथिलेश, नरेंद्र प्रसाद सिंह, अवधेश प्रसाद आदि ने देर शाम तक काव्य की महफ़िल सजाये रखा।

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