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विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस के अवसर पर शेखपुरा में कार्यक्रम का हुआ आयोजन

आज दुनिया भर में विश्व ऑटिज़्म (आत्मकेंद्रित) जागरूकता दिवस मनाया जा रहा है। यह खास दिन हर साल 2 अप्रैल को लोगों को ऑटिज्म के प्रति जागरूक करने के लिए मनाया जाता है। दरअसल, ऑटिज़्म एक मानसिक रोग है, जिसमें बच्चे का दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है। ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण 1-3 साल के बच्चों में नजर आते हैं। इस अवसर पर जिलाधिकारी इनायत खान के निर्देश पर सामाजिक सुरक्षा कोषांग के द्वारा आज प्रभातफेरी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

क्या है ऑटिज़्म?
प्रभात फेरी के दौरान सभी उपस्थित पदाधिकारी, कर्मियों एवं बच्चों को थेरेपिस्ट एवं शिक्षा विभाग के रिसोर्स टीचर के द्वारा ऑटिज़्म के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि यह एक न्यूरोडेवलपमेंट विचार है। जिससे बच्चों का संज्ञानात्मक, भावनात्मक, व्यक्तिगत, सामाजिक और संप्रेषण विकास प्रभावित होता है। इससे ग्रसित होने वाले बच्चे अपने आप में खोए रहते हैं तथा समाज की मुख्यधारा से बिल्कुल ही अपरिचित एवं अंजान बने रहते हैं। सभी को यह बताया गया कि ऐसे बच्चों को अपनाने की आवश्यकता है। साथ ही उन्हें हीन भावना से नहीं देखने का संकल्प लिया गया।
क्या है उपाय?
मौके पर मौजूद एसडीसी सोनी कुमारी ने कहा कि समाज में अवस्थित ऑटिज्म जैसे रूढ़िवाद को तोड़ने की आवश्यकता है। ऐसे बच्चे जो इस विकार से ग्रसित हैं, उनको प्यार और अपनापन की आवश्यकता होती है। ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तरह कार्य नहीं कर पाते, अतः इन्हें चिन्हित कर सही उपचार करना जरूरी है। थेरेपी के माध्यम से इस न्यूरोलॉजिकल डेवलपिंग को ठीक किया जा सकता है। इसमें जिला स्तर पर अवस्थित बुनियादी केंद्र जो दल्लू चौक के पास संचालित हैं, काफी सहायक साबित हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बच्चे सामान्य बच्चों की तुलना में अधिक रचनात्मक होते हैं। ऐसे बच्चों को समाज से तिरस्कृत करना तथा उनका उपहास उड़ाना पूर्णतया गलत है। उन्होंने बच्चों को भी यह संकल्प लेने को कहा कि यदि अपने आस-पास ऑटिज्म से ग्रसित बच्चे को देखते हैं तो उनसे संप्रेषण करें और उनको समझने की कोशिश करें तथा उनका सहयोग दें। सामाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक ने बताया कि विश्व आत्मकेंद्रित जागरूकता दिवस के अवसर पर आज यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उक्त कार्यक्रम में सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, शिक्षा अधिकारी आदि उपस्थित थे ।

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