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बरबीघा नगर परिषद के विस्तारीकरण से गरीबों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव, नगर सभापति ने इस फैसले को बताया गलत

शेखपुरा जिले के बरबीघा नगर परिषद क्षेत्र के विस्तारीकरण पर महीनों से चली आ रही उठा-पटक का दौर आज खत्म हो गया। वहीं नगर एवं आवास विभाग के द्वारा बरबीघा के विस्तारीकरण की अधिसूचना जारी होते ही क्षेत्र में चर्चाओं का दौर फिर शुरू हो गया। इस अधिसूचना के बाद क्षेत्र में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल छा गया। दरअसल नगर परिषद के विस्तार को लेकर तेउस, जगदीशपुर तथा सामस खुर्द पंचायत के सभी गांव को शामिल करने का प्रस्ताव जिला प्रशासन के द्वारा भेजा गया था। जिसके बाद क्षेत्र के कई जन-प्रतिनिधियों के द्वारा दावा-आपत्तियों का सिलसिला शुरू हो गया था। दावा-आपत्तियों पर पुनर्विचार करने के बाद विभाग के द्वारा विस्तारीकरण की अधिसूचना जारी किया गया। जिसमें जगदीशपुर पंचायत के दो गांव तेतारपुर तथा सरैया जबकी सामस खुर्द पंचायत के खोजागाछी, दरियाचाक, खलीलचक, सामस खुर्द तथा बबनबीघा गांव को शामिल किया गया। अधिसूचना जारी होने के बाद नगर सभापति रौशन कुमार ने इस अधिसूचना को गलत बताते हुए रोष प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि नगर परिषद की स्थाई समिति के द्वारा विरोध करने के बावजूद भी उनके आग्रह पर अमल नहीं किया गया, जो दुःखद है। नगर परिषद में जिन इलाकों को शामिल किया गया है, वहां के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन कृषि है। शहर के लोगों को बिजली, पानी सहित अन्य टैक्स गांव के मुकाबले ज्यादा देने पड़ते हैं। जिससे इन क्षेत्रों के किसानों तथा मजदूर वर्ग के लोगों पर फिलहाल भारी आर्थिक दबाब पड़ेगा। गौरतलब हो कि नगर सभापति के द्वारा पूर्व में प्रमंडलीय बैठक में नगर विकास एवं आवास मंत्री को इस बाबत आपत्ति पत्र भी सौंपा गया था।

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