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बरबीघा में लगेगा जियोफेन्सिंग (Geofencing) टेक्नोलॉजी के तहत सेंट्रलाइज सर्विलांस सिस्टम, जानें पूरी बात

शेखपुरा जिले का बरबीघा नगर परिषद विकास के प्रति हमेशा से ही तत्पर रहा है। बात चाहे केंद्रीय योजनाओं की हो या राज्य स्तरीय योजनाओं की! सभी विकास कार्यों के क्रियान्वयन में यहां अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाता है। आने वाले दिनों में बरबीघा का श्री कृष्ण चौक और थाना चौक का इलाका देखने लायक होगा। दोनों जगहों पर ज़ेब्रा क्रोसिंग, हाई क्वालिटी के कैमरा के अलावा ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम भी लगाया जा रहा है। इस खबर से हमने पहले भी आपको रूबरू करवाया है। इतना ही नहीं बरबीघा में अब जियोफेन्सिंग (Geofencing) टेक्नोलॉजी के तहत एक सेंट्रलाइज सर्विलांस सिस्टम भी लगने जा रहा है। जो शहर की कानून व्यवस्था को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होगा। पूरे मुंगेर प्रमंडल में इस तरह का पहला प्रयोग यहां होने जा रहा है। इस बात की जानकारी देते हुए नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी कुमार ऋत्विक ने बताया कि इस टेक्नोलॉजी के तहत बरबीघा नगर परिषद की पूरी सीमा के अंतर्गत 24 घंटे शहर से गुजरने वाले हर एक छोटे-बड़े वाहनों का रिकॉर्ड नगर परिषद के पास होगा। इस टेक्नोलॉजी के शुरुआत के बाद शहर में गाड़ियों की चोरी, छिनतई, लूट-पाट, वाहनों की ओवरलोडिंग आदि घटनाओं में कमी आएगी। यहां तक कि आस-पास के इलाकों में भी इन घटनाओं के बाद जो अपराधी बरबीघा नगर परिषद के इलाके से गुजरेंगे, वो इस टेक्नोलॉजी के तहत लगाए गए कैमरे की नजर से बच नहीं पाएंगे।

इसके अलावा इसकी मदद से शहर के सभी सरकारी कार्यालयों में कार्यरत्त कर्मियों के वाहनों व नगर परिषद में कार्यरत्त कर्मियों पर भी नजर रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिये सारी तैयारी पूरी की जा रही है। पटना से एक्सपर्ट को बुलाया गया है। अगले 10-15 दिनों में डीपीआर तैयार हो जाएगा और उसके बाद कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा। इन सभी कार्यों के पूर्ण होने के बाद शेखपुरा जिले का यह छोटा सा शहर अत्याधुनिक शहर बनने की ओर अग्रसर हो जाएगा।
क्या है जिओफेन्सिंग
जिओ फेंसिंग’ एक लोकेशन बेस सर्विस है जिसकी मदद से कई दूसरे सॉफ्टवेयर और एप्‍स जीपीएस का प्रयोग करते है, इसके अलावा वाई-फाई, सेलुलर डेटा और पहले से तय किए गए कई प्रोग्राम में भी इसका प्रयोग होता है। अगर आपने कभी ध्‍यान दिया हो क्‍यूआर कोड स्‍कैन करते समय आपकी लोकेशन के साथ कई दूसरे जानकारी फोन पर हमें मिल जाती है ये सब जियो फेंसिंग की मदद से ही होता है। इसका प्रयोग प्रचार, सोशल मीडिया और कई तरह के एलर्ट में भी होता है। अगर आप किसी गाड़ी की लोकेशन या फिर किसी व्‍यक्ति को ट्रैक करना चाहते हैं तो जियो फेंसिंग की मदद से उसका सटीक लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। भारत के लगभग 8 राज्‍यो में ‘जिओ फेंसिंग’ का यूज़ कोरोना वायरस से ग्रसित होने के संदिग्‍ध व्‍यक्तियों पर किया गया है। इसकी मदद से आइसोलेशन में रखे गए व्‍यक्ति को आसानी से ट्रैक किया गया। जैसे ही वो तय किए गए दायरे से बाहर की ओर निकलते थे, इसका एलर्ट वहां पर मौजूद सभी अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों के पास चला जाता था।

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