राजनीतिशेखपुरा

कांग्रेस कार्यालय में तालाबंदी का विवाद गहराया, पूर्व जिलाध्यक्ष ने भी खोला मोर्चा, कहा जानबूझकर बनाया गया विवाद

शेखपुरा के जिला कांग्रेस कार्यालय आजाद हिंद आश्रम में तालाबंदी का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पार्टी के वर्तमान जिलाध्यक्ष सुंदर साहनी ने जद यू के बरबीघा के वर्तमान विधायक के समर्थकों के द्वारा कांग्रेस कार्यालय में तालाबंदी की बात को लेकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। कल 27 फरवरी को कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रभारी व प्रदेश अध्यक्ष के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम का हवाला देते हुए उन्होंने कार्यक्रम को असफल बनाने की रणनीति के तहत तालाबंदी की बात भी की है। उन्होंने बजाप्ते अंचल कार्यालय की रसीद भी मीडिया को दिया है, जिसमें साफ-साफ कांग्रेस कार्यालय का नाम दर्ज है। वहीं दूसरी तरफ शेखपुरा विधानसभा से लोजपा के पूर्व प्रत्याशी इमाम गजाली ने इस मुद्दे पर मीडिया को बयान देकर आग में घी डाला है। उन्होंने कहा है कि उनके दादा ने इस जमीन को कांग्रेस के नाम दान में दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने वर्तमान शेखपुरा थाना की जमीन को भी दादा के द्वारा दान में देने की बात कही है। इन सभी घटनाक्रम के बाद आज कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष कुमार सत्यजीत ने प्रेसवार्ता आयोजित किया। जिसमें श्रवण सिंह, मो असलम, इरशाद, महफूज खान, मुश्ताक खान, राकेश प्रसाद, शरण महतो सहित सैकड़ों कार्यकर्त्ता भी मौजूद थे। पूर्व जिलाध्यक्ष ने मीडिया में आई तमाम तरह की बातों का खंडन किया और कहा कि किसी ने तालाबंदी नहीं की है। जितना पार्टी को जरूरत है, उन सभी तालों की चाबी कांग्रेस जिलाध्यक्ष के पास है। पार्टी में कार्यकर्ताओं के बढ़ते विरोध के कारण उन्होंने जानबूझकर साजिश के तहत विवाद को हवा देने का काम किया है। साथ ही उन्होंने कहा इसमें बरबीघा बिधायक का नाम बेबजह उछाला गया है। वो जद यू में हैं, उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं उन्होंने वर्तमान जिलाध्यक्ष पर कार्यालय की महिला केयरटेकर के साथ बदतमीजी का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इनको जिलाध्यक्ष बनाकर शेखपुरा को थोप दिया है। सारे कार्यकर्ता इन से नाराज हैं क्योंकि इनका रवैया डिक्टेटरशिप वाला है। पार्टी के किसी कार्यक्रम की खबर कार्यकर्ताओं को नहीं दी जाती है। किसी भी कार्यकर्ता को 27 फरवरी को प्रदेश के नेताओं के आने की सूचना भी नहीं मिली है। पूर्व जिलाध्यक्ष ने पार्टी से मांग की है कि स्थानीय स्तर पर जिलाध्यक्ष का चुनाव करवाएं, ताकि जिले में पार्टी का विस्तार हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि यह कार्यालय आजाद हिंद आश्रम है और वर्षों से कांग्रेस कार्यालय के रूप में इस्तेमाल होता आ रहा है। पर इसके लिए कभी भी किसी को रोका नहीं गया है। अब सच क्या है ये तो जांच का विषय है। पर इस प्रेसवार्ता के दौरान ही वहां शेखपुरा थानाध्यक्ष भी मामले की जांच करने पहुँचे। उन्होंने भी इस विवाद को मामूली बताया जिसे बेबजह तूल दिया गया है।

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