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Ara Sasaram Railway Line: भोजपुर में आरा-सासाराम रेल लाइन दोहरीकरण का सर्वे शुरू, 700 करोड़ की परियोजना से क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार

110 किमी लाइन पर 700 करोड़ की परियोजना; टेंडर पूरा, जमीन अधिग्रहण तेज, ट्रेनों की संख्या व स्पीड बढ़ेगी

Ara Sasaram Railway Line: भोजपुर और रोहतास जिलों के यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय से लंबित आरा-सासाराम रेलखंड का दोहरीकरण अब जल्द हकीकत बनेगा। रेल मंत्रालय की मंजूरी के बाद सर्वे कार्य जोरों पर चल रहा है। 110 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के दोहरीकरण पर करीब 700 करोड़ रुपये खर्च होंगे। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण की तैयारी तेज हो गई है।

सर्वे कार्य में क्या हो रहा है?

भोजपुर और रोहतास जिलों में संयुक्त सर्वे चल रहा है। प्रशासनिक अधिकारी और रेलवे टीम मिलकर जमीन की पैमाइश कर रही है। रूट मैप तैयार किया जा रहा है। जहां बाधाएं हैं, जैसे पुराने निर्माण या नदी-नाले, उनकी पहचान हो रही है। निर्माण एजेंसी को साइट सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

हाजीपुर रेलवे जोन के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने कहा, “डीडीयू रेल मंडल के अंतर्गत आरा-सासाराम रेलखंड पर दोहरीकरण के लिए टेंडर जारी हो चुका है। जमीन सर्वे और अधिग्रहण के बाद रेल लाइन बिछाने का काम शुरू होगा।”

इस परियोजना से क्या फायदे होंगे?

आरा-सासाराम रेलखंड का दोहरीकरण होने से कई लाभ मिलेंगे:

  • मुख्य लाइन (दानापुर-मुगलसराय) पर दबाव कम होगा। ट्रेनों को आसानी से डायवर्ट किया जा सकेगा।
  • ज्यादा ट्रेनें चल सकेंगी। यात्रियों को कम देरी और बेहतर सुविधा मिलेगी।
  • चौसा थर्मल पावर प्लांट को कोयला ढुलाई आसान और सस्ती होगी। प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
  • रेलवे को माल ढुलाई से ज्यादा राजस्व मिलेगा।
  • भोजपुर, रोहतास और कैमूर जिलों के लोग सीधे फायदा उठाएंगे। क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा और विकास तेज होगा।

यह परियोजना भोजपुर के लोगों की पुरानी मांग थी। अब सर्वे तेज होने से उम्मीद जगी है कि काम जल्द शुरू होगा।

Ara Sasaram Railway Line: कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?

परियोजना को तीन साल में पूरा करने का लक्ष्य है। जमीन अधिग्रहण में तेजी आने से निर्माण समय पर हो सकेगा। रेलवे अधिकारी आश्वस्त हैं कि जल्द साइट एजेंसी को सौंप दी जाएगी।

भोजपुर के लोग इस परियोजना से बहुत खुश हैं। ट्रेनों की संख्या बढ़ने से यात्रा आसान होगी। व्यापार और रोजगार के नए मौके आएंगे। बिहार सरकार और रेल मंत्रालय का यह कदम क्षेत्रीय विकास के लिए बड़ा तोहफा है। उम्मीद है कि जल्द रेल की पटरी बिछने लगेगी और यात्रियों को राहत मिलेगी।

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