गांधी जयंती पर बिहार सरकार का बड़ा फैसला, 44 कैदी जेल से हुए रिहा, अच्छे आचरण का मिला लाभ
बिहार सरकार ने राज्य की अलग-अलग जेलों में लंबे समय से सजा काट रहे 44 बंदियों को 2 अक्टूबर को कारामुक्त किया, इनमें बड़ी संख्या बुजुर्ग और बीमार कैदियों की है।

पटना। गांधी जयंती के मौके पर बिहार सरकार ने जेलों में लंबे समय से सजा काट रहे 44 कैदियों को रिहा करने का फैसला लागू किया है। राज्य कैदी परिहार समिति की सिफारिश के आधार पर इन बंदियों की रिहाई की गई। इसमें अच्छे आचरण, अधिक उम्र, लंबे समय से सजा काटने और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा गया।
गांधी जयंती पर 44 कैदियों को मिली रिहाई
सरकारी फैसले के तहत 2 अक्टूबर को बिहार की अलग-अलग जेलों से कुल 44 बंदियों को कारामुक्त किया गया। रिपोर्ट के अनुसार रिहा होने वालों में 90 वर्ष से ज्यादा उम्र के दो कैदी, 80 वर्ष से अधिक उम्र के आठ और 70 से 80 वर्ष की उम्र के 20 कैदी शामिल हैं।
बक्सर और भागलपुर जेल के कैदी भी शामिल
बक्सर केंद्रीय कारा और ओपन जेल से कुल सात कैदियों को रिहा किया गया। इनमें चार केंद्रीय कारा और तीन ओपन जेल में सजा काट रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार सभी की उम्र 73 वर्ष से अधिक थी और कुछ कैदी गंभीर बीमारियों से भी जूझ रहे थे। वहीं, भागलपुर की शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा और विशेष केंद्रीय कारा से भी छह बंदियों को रिहा किया गया। इनमें चार बंदी शहीद जुब्बा सहनी केंद्रीय कारा और दो विशेष केंद्रीय कारा से मुक्त हुए।
गांधी जयंती के मौके पर जेलों में प्रभात फेरी, गांधीजी की प्रतिमा पर माल्यार्पण और उनके विचारों पर कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। बंदियों और जेल अधिकारियों ने गांधीजी के विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
सरकार दे रही पीड़ित परिवारों को भी आर्थिक मदद
इसी मौके पर बिहार सरकार ने अपराध से प्रभावित 1,820 पीड़ित परिवारों को करीब 3.86 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने का फैसला भी किया है। यानी सरकार की पहल में एक तरफ पात्र कैदियों के सामाजिक पुनर्वास पर ध्यान दिया गया है, तो दूसरी तरफ अपराध से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की व्यवस्था भी की गई है।


