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मंत्रिमंडल से बर्खास्तगी से लेकर बिहार के सीएम तक, जानिए कौन है सम्राट चौधरी?

Desk: सीएम नीतीश कुमार ने अंतत इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफा देने के बाद से उन तमाम अटकलें पर विराम लग गया जो राज्य की सियासत में कई दिनों से चल रहे थे। दरअसल सीएम नीतीश कुमार के हटने के बाद उनकी जगह पर उनकी राजनीतिक विरासत को संभालने वाले संभावित चेहरे में कई नाम शामिल थे। जो पिछले कुछ दिनों से छाए हुए थे। उनमें सबसे प्रमुख और मजबूत चेहरा राज्य के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का था। अब सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। यानी राज्य के अगले मुख्यमंत्री के रूप में अब सम्राट चौधरी शपथ लेंगे।

राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने के बाद

राजद से किया था सियासत का आगाज
19 साल की उम्र से सियासत में आगाज
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। दरअसल उनके पिता शकुनी चौधरी की गिनती राज्य के बड़े नेताओं में होती है। सम्राट चौधरी ने अपने पिता के सानिध्य में ही राजनीति की शुरुआत की थी। मजे की बात यह है कि जिस आरजेडी, लालू प्रसाद और तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी विरोध करते हैं, उन्हीं लालू प्रसाद यादव की पाठशाला में सम्राट चौधरी ने राजनीति के क, ख, ग को सीखा था। उन्होंने राजद से ही अपनी राजनीति की शुरुआत की थी।

57 साल की है उम्र
16 नवंबर 1968 को जन्मे सम्राट चौधरी की शादी ममता कुमारी से हुई थी। इनके पिता का नाम शकुनी चौधरी है, वही माता का नाम पार्वती देवी है। सम्राट चौधरी को एक बेटा और एक बेटी है। उनके पिता शकुनी चौधरी की गिनती एक समाजवादी नेता के रूप में होती है। शकुनी चौधरी कभी राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खास हुआ करते थे। कालांतर में शकुनी चौधरी ने अपनी राजनीतिक दिशा को नया आयाम दिया और वह नीतीश कुमार के साथ हो गए।

19 साल की उम्र में मंत्री
महज 19 साल की उम्र में पहली बार मंत्री बनने वाले सम्राट चौधरी को मंत्रिमंडल से बर्खास्त भी किया गया था। राजनीतिक जानकारों की माने तो उस समय सम्राट चौधरी की बर्खास्तगी का कारण उनका उम्र को लेकर के हुआ विवाद था। दरअसल सम्राट चौधरी तत्कालीन राजद सरकार में कृषि राज्य मंत्री थे। कहा तो यह भी जाता है कि उनके लिए एक खास विभाग का गठन किया गया था। बताया तो यह भी जाता है कि जिस भारतीय जनता पार्टी के चेहरे के रूप में सम्राट चौधरी को चुना गया है, तब इसी भारतीय जनता पार्टी ने ही उनकी उम्र को लेकर के अपने विरोध को जताया था। कम उम्र होने के कारण राज्यपाल के द्वारा उनको हटा दिया गया था। हालांकि बाद में सम्राट चौधरी बीजेपी में शामिल हुए और उन्होंने अपनी एक राजनीतिक पहचान बनाई। लेकिन उनके पूरे राजनीतिक कैरियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी उम्र से जुड़ा यह विवाद भी रहा है।1999 में सम्राट चौधरी की कम उम्र होने के कारण तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने बिहार कैबिनेट से हटाया था। तब राज्यपाल ने कथित तौर पर कम उम्र के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त तो किया ही था उनके खिलाफ जालसाजी, गलत बयानी, झूठी घोषणा करने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया था। दरअसल तब यह बात सामने आई थी कि सम्राट के दस्तावेज में उनकी उम्र 26 साल है। उनके स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में उम्र 31 साल बताई गई थी। वही हत्या के एक मामले में सम्राट चौधरी ने 1995 में दावा किया था कि तब वह नाबालिग थे। इसके अलावा उनके बड़े भाई जो तब इंजीनियरिंग कर रहे थे उनकी उम्र 22 साल थी।

नए राज्यपाल ने लिया था निर्णय
सम्राट चौधरी की उम्र को लेकर विवाद पहली बार तब सामने आया जब तत्कालीन समता पार्टी के नेता रघुनाथ झा और पीके सिन्हा ने तत्कालीन राज्यपाल जस्टिस बीएम लाल और राज्य के मुख्य निर्वाचन पर अधिकारी एके बसु के पास जानकारी दी थी कि चौधरी की उम्र 25 साल नहीं है। इसलिए वह मंत्री बनने के लिए योग्य नहीं है। तब जस्टिस लाल ने एके बसु को मामले की जांच कर 25 दिनों के अंदर रिपोर्ट को पेश करने को कहा था। हालांकि इसके बाद जस्टिस रिटायर हो गए लेकिन यह मुद्दा तब फिर उभर गया था जब कार्यवाहक गवर्नर ने सीईओ को उस वक्त 5 नवंबर तक पूरी रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया था। तब रिपोर्ट में बताया गया था कि सम्राट चौधरी ने जांच करने वालों के साथ सहयोग नहीं किया। दावा यह भी किया गया था कि राज्यपाल के पास सम्राट चौधरी की उम्र से संबंधित कई दस्तावेज भी है, जो विसंगतियों से भरे हुए हैं।

बर्खास्त होने के बाद सीएम
बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सम्राट चौधरी का राजनीतिक जीवन भी काफी कौतूहल भर रहा है। दरअसल सम्राट चौधरी संभवत पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो मंत्रिमंडल से बर्खास्त होने के बाद इस ऊंचाई तक पहुंचे हैं। राबड़ी मंत्रिमंडल में जब यह बात सामने आई थी कि सम्राट चौधरी की उम्र मंत्री बनने के वक्त कम थी यानी वह नाबालिक थे। तब उनके खिलाफ फर्जी वाले व गलत जानकारी देने का मामला भी दर्ज हुआ था और उसमें कार्रवाई हुई थी।

सम्राट ने मिथक को भी तोड़ा
दरअसल सम्राट चौधरी ने मंत्री बनने से लेकर के मुख्यमंत्री बनने तक के सफर में कई मिथक को भी तोड़ दिया है। सम्राट चौधरी बिहार के दूसरे ऐसे नेता हैं जो पहले डिप्टी सीएम रहे और उसके बाद अब सीएम बने हैं। बिहार में कर्पूरी ठाकुर अब तक एकमात्र ऐसे नेता रहे हैं जो पहले डिप्टी सीएम रहे और बाद में मुख्यमंत्री बने थे। राज्य में सुशील कुमार मोदी, तार किशोर प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा और तेजस्वी यादव के अलावा पहले उपमुख्यमंत्री बनने वाले अनुग्रह नारायण सिंह भी इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाए थे। वहीं पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने वाल रेणु देवी भी सीएम नहीं बन सकी थी। सम्राट चौधरी ने अब उस सूची में अपना नाम लिखवा लिया है, जिस सूची में एक अब तक एकमात्र नाम कर्पूरी ठाकुर का था।

कई दलों के बाद बीजेपी में
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय जनता दल के साथ की थी। हालांकि बाद में भी जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए थे। 2014 में जब सीएम नीतीश कुमार ने अपनी जगह पर जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया था, तब सम्राट चौधरी जीतन राम मांझी की सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। जनता दल यूनाइटेड छोड़ने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे।

वक्त वक्त पर होता रहा विवाद
अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में ही कम उम्र का विवाद झेलने वाले सम्राट चौधरी कभी सीएम नीतीश कुमार को हटाने को लेकर के मुरेठा बांधने तक काफी चर्चा में रहे। सम्राट चौधरी की पढ़ाई को लेकर भी काफी सवाल उठाए गए थे। तब जनता दल यूनाइटेड ने हीं उनकी डिग्री पर सवाल उठाया था। 2025 के विधानसभा चुनाव में भी उनकी डिग्री को लेकर के काफी सवाल उठाया गया था। जन सूरज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी सम्राट चौधरी के ऊपर कई आरोप लगाए थे। एक कार्यक्रम में उनके द्वारा हाफिडेबिट कहे जाने पर भी काफी विवाद हुआ था।

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