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Shambhu Hostel Case: पटना नीट छात्रा मौत मामले में हॉस्टल मालिक की जमानत याचिका पर 28 फरवरी को निर्णायक सुनवाई, कोर्ट ने CBI और SIT से मांगी जांच की पूरी श्रृंखला

नीट छात्रा की संदिग्ध मौत में बेली अस्पताल रिपोर्ट से POCSO आरोप साबित, 28 फरवरी को जमानत पर फैसला

Shambhu Hostel Case: बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में 9 जनवरी 2026 को हुई इस दुखद घटना ने न केवल पूरे राज्य को झकझोर दिया है, बल्कि महिला छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच अब दोहरी हो चुकी है, जहां एक तरफ बिहार पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) काम कर रही है, तो दूसरी तरफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अपनी स्वतंत्र जांच में जुटा हुआ है। गुरुवार को POCSO विशेष कोर्ट ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई की और दोनों जांच एजेंसियों से जांच की पूरी श्रृंखला (चेन ऑफ इन्वेस्टिगेशन) मांगते हुए अगली सुनवाई 28 फरवरी तय की है।

घटना की पूरी पृष्ठभूमि

9 जनवरी 2026 की सुबह शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली नीट की तैयारी कर रही छात्रा बेहोश हालत में मिली थी। हॉस्टल प्रबंधन ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। छात्रा के पिता ने चित्रगुप्त नगर थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने बेटी के शरीर पर चोट के निशान होने और यौन शोषण की कोशिश का संदेह जताया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन, कुछ कर्मचारियों और अन्य संदिग्धों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ POCSO एक्ट की गंभीर धाराएं लगाईं।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए छात्र संगठनों, महिला अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों ने तीखा विरोध जताया। पटना में कई दिनों तक प्रदर्शन हुए और न्याय की मांग तेज हुई। बिहार सरकार ने दबाव में आकर जांच CBI को सौंप दी, लेकिन SIT भी अपनी जांच जारी रखे हुए है।

कोर्ट में हुई सुनवाई और उठाए गए सवाल

गुरुवार को POCSO विशेष न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में हॉस्टल मालिक की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। CBI और SIT के जांच अधिकारी दोनों सशरीर कोर्ट में उपस्थित रहे। कोर्ट ने कई गंभीर सवाल उठाए:

  • आरोपी को जेल में रखने का क्या ठोस आधार है?

  • POCSO एक्ट के जुड़ने से मामले की गंभीरता बढ़ गई है, क्या जमानत देने से जांच प्रभावित होगी?

  • CBI ने FIR को विशेष न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में क्यों भेजा, क्या यह प्रक्रिया सही है?

कोर्ट ने दोनों एजेंसियों से जांच की पूरी श्रृंखला मांगी, जिसमें अब तक के साक्ष्य, गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल होंगे। न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि 28 फरवरी को दोनों एजेंसियां विस्तृत रिपोर्ट पेश करेंगी, जिसके आधार पर जमानत याचिका पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

बचाव पक्ष और अभियोजन की दलीलें

बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में दावा किया कि हॉस्टल मालिक को बिना ठोस सबूत के 15 जनवरी से जेल में रखा गया है। उन्होंने इसे षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि कुछ माफिया तत्व हॉस्टल व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने के लिए यह साजिश रच रहे हैं। वकील ने तर्क दिया कि लंबी हिरासत न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है और जमानत दी जानी चाहिए।

दूसरी ओर, विशेष लोक अभियोजक सुरेश चंद्र प्रसाद और सूचक के अधिवक्ता एसके पांडेय ने जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि POCSO एक्ट की धाराएं जुड़ने से आरोपी को जमानत मिलना मुश्किल है। मामला बेहद गंभीर है और जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। जमानत देने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों पर दबाव का खतरा है।

दोहरी जांच और समन्वय की चुनौतियां

मामले में CBI और SIT दोनों की जांच चल रही है, जो असामान्य है। CBI ने SIT अधिकारियों से भी पूछताछ की है। कोर्ट ने दोनों एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरी जांच से मामला जटिल हो सकता है, लेकिन यह निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए भी जरूरी हो सकता है। दोनों एजेंसियां अलग-अलग साक्ष्य इकट्ठा कर रही हैं, जिसमें हॉस्टल की CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, गवाह बयान और फोरेंसिक रिपोर्ट शामिल हैं।

हॉस्टल सुरक्षा पर सवाल और सरकार के कदम

इस घटना ने पटना समेत पूरे बिहार में छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्र संगठनों ने मांग की है कि सभी हॉस्टलों में CCTV अनिवार्य हो, महिला सुरक्षा गार्ड नियुक्त किए जाएं और नियमित निरीक्षण हो। बिहार सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सभी हॉस्टलों के लिए नए सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग ने हॉस्टल प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन होने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।

परिवार और समाज की मांग

मृत छात्रा के परिवार को पूरे बिहार से समर्थन मिल रहा है। पिता ने कहा कि उनकी बेटी बेहद होनहार थी और नीट में सफल होने का सपना देख रही थी। परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है और CBI जांच से संतुष्टि जता रहा है। समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश है और लोग मांग कर रहे हैं कि दोषियों को कड़ी सजा मिले। छात्र संगठन कह रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कानून और जागरूकता की जरूरत है।

Shambhu Hostel Case: 28 फरवरी का महत्व

28 फरवरी को होने वाली सुनवाई इस मामले में निर्णायक साबित हो सकती है। कोर्ट को दोनों एजेंसियों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर तय करना होगा कि हॉस्टल मालिक को जमानत दी जाए या नहीं। यदि जमानत खारिज हुई, तो आरोपी की हिरासत जारी रहेगी। वहीं, यदि जमानत मिली, तो जांच पर असर पड़ सकता है।

यह मामला केवल एक छात्रा की मौत का नहीं है, बल्कि हजारों छात्राओं की सुरक्षा और हॉस्टल व्यवस्था का भी है। कोर्ट का फैसला न केवल इस केस को दिशा देगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी मिसाल बनेगा। CBI और SIT की रिपोर्ट से सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।

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