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Bihar News: बिहार को रेलवे की बड़ी सौगात, पुनारख-किऊल खंड पर तीसरी-चौथी लाइन को मंजूरी, 2,668 करोड़ की परियोजना से पटना-लखीसराय को नया कनेक्शन

केंद्र ने 2,668 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी, 49.57 किमी नई लाइन से पटना-लखीसराय कनेक्टिविटी मजबूत, 3 साल में पूरा होगा

Bihar News: बिहार के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को पुनारख से किऊल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन के निर्माण को मंजूरी दे दी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 2,668 करोड़ रुपये है और इसे तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इसे बिहार के लिए ऐतिहासिक कदम करार दिया, जो यात्रियों, माल ढुलाई और आर्थिक विकास को नई गति देगा।

परियोजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ

यह परियोजना लगभग 49.57 किलोमीटर लंबी है, जो पटना और लखीसराय जिलों से होकर गुजरेगी। वर्तमान में इस खंड पर केवल दो रेल लाइनें हैं, जिस कारण ट्रेनों की क्रासिंग, सिग्नलिंग और भीड़भाड़ के चलते काफी देरी होती है। नई तीसरी और चौथी लाइन के बनने से इस सेक्शन की क्षमता में भारी वृद्धि होगी।

यह खंड कोलकाता से प्रयागराज तक जाने वाले मुख्य रेल कॉरिडोर का हिस्सा है, जो पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। अतिरिक्त लाइनों से मालगाड़ियों की संख्या बढ़ेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और सालाना लाखों टन कोयला, सीमेंट, स्टील, उर्वरक तथा अनाज की ढुलाई आसान हो जाएगी।

इस क्षेत्र में एनटीपीसी बाढ़, एनटीपीसी बरौनी, कई सीमेंट प्लांट और पावर प्लांट जैसी बड़ी इकाइयां हैं। साथ ही फतुहा, मोकामा, बख्तियारपुर, बरहिया और लखीसराय में ऑटोमोबाइल, मार्बल, स्टोन क्रशिंग, फूड प्रोसेसिंग, पेट्रोलियम और टेक्सटाइल जैसे उद्योग सक्रिय हैं। नई लाइनों से इन उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

यात्रियों के लिए भी यह बड़ा फायदा साबित होगा। पैसेंजर ट्रेनों की संख्या और स्पीड बढ़ेगी, पटना-किऊल-झाझा सेक्शन पर भीड़ कम होगी और यात्रा समय में कमी आएगी। इससे पटना से लखीसराय और आगे के इलाकों को नया और तेज रेल संपर्क मिलेगा।

उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रतिक्रिया

उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस परियोजना को बिहार के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार में रेलवे का तेजी से विस्तार हो रहा है। राज्य में रेलवे विकास के लिए 10 हजार करोड़ से अधिक का बजट आवंटित किया गया है। वर्तमान में 14 वंदे भारत और 21 अमृत भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं। हाल ही में वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को भी मंजूरी मिली है।

चौधरी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का विशेष धन्यवाद दिया और कहा कि ये फैसले बिहार की कनेक्टिविटी को मजबूत कर रहे हैं, जिससे शिक्षा, व्यापार और रोजगार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी।

तीन परियोजनाओं की मंजूरी

यह परियोजना केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर तीन रेल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स में से एक है, जिनकी कुल लागत लगभग 9,072 करोड़ रुपये है। इनसे भारतीय रेलवे नेटवर्क में करीब 307 किलोमीटर की वृद्धि होगी। अन्य दो परियोजनाएं हैं:

  • महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश में गोंदिया-जबलपुर सेक्शन का डबलिंग (लागत 5,236 करोड़ रुपये)।

  • झारखंड में गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी और चौथी लाइन (लागत 1,168 करोड़ रुपये)।

ये सभी प्रोजेक्ट 2030-31 तक पूरे होने की उम्मीद है और महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार तथा झारखंड के आठ जिलों को कवर करेंगे। इनसे फ्रेट क्षमता में 52 मिलियन टन प्रति वर्ष की बढ़ोतरी होगी और व्यस्त रूट्स पर भीड़ कम होगी।

बिहार में रेलवे विकास की गति

बिहार में हाल के वर्षों में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जा रहा है। नए स्टेशनों का विकास, वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार तथा प्रमुख कॉरिडोरों पर मल्टी-ट्रैकिंग से राज्य की कनेक्टिविटी मजबूत हो रही है। यह परियोजना पूर्वी भारत के आर्थिक विकास को नई दिशा देगी, खासकर पटना-लखीसराय क्षेत्र में जहां औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परियोजनाएं न केवल यात्रा को सुगम बनाती हैं, बल्कि क्षेत्रीय असंतुलन को कम करने में भी मदद करती हैं। बिहार सरकार और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय से ऐसे फैसले राज्य के लिए वरदान साबित हो रहे हैं।

Bihar News: विकास की नई राह

पुनारख-किऊल तीसरी-चौथी लाइन की मंजूरी बिहार के लिए एक और मील का पत्थर है। इससे न केवल यात्रियों और व्यापारियों को राहत मिलेगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। केंद्र सरकार के इस कदम से बिहार में रेलवे का आधुनिकीकरण तेज होगा। अब इंतजार सिर्फ निर्माण की तेजी का है, ताकि तीन वर्षों में यह परियोजना हकीकत बन सके।

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