Bihar Budget Session: बिहार विधानसभा में UGC नियमों पर तीखा बवाल, माले विधायक संदीप सौरभ की 'ब्राह्मणवाद' टिप्पणी पर हंगामा, स्पीकर ने शब्द हटाने का दिया आदेश
माले विधायक संदीप सौरभ की 'ब्राह्मणवादी मानसिकता' टिप्पणी पर सदन में हंगामा, स्पीकर ने शब्द हटाने का आदेश दिया, UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक चर्चा में
Bihar Budget Session: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर जातिगत टिप्पणियों और राजनीतिक नोकझोंक ने सदन का माहौल गरमा दिया। भाकपा (माले) के विधायक संदीप सौरभ ने यूजीसी के नए नियमों ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ को लागू करने की मांग उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन पर लगाई गई रोक को ‘ब्राह्मणवादी मानसिकता’ से जोड़ दिया। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष के विधायकों ने तीव्र विरोध जताया, जिससे सदन में भारी हंगामा मच गया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विवादित ‘ब्राह्मण’ शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया।
यह घटना उच्च शिक्षा में जाति आधारित भेदभाव रोकने के मुद्दे पर केंद्रित थी, लेकिन यह जल्द ही जातिगत बहस में बदल गई। सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के दौरान विधायकों ने एक-दूसरे पर उंगली दिखाई और आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इस भाषा को असंवैधानिक बताते हुए कड़ी निंदा की।
माले विधायक ने क्या कहा, क्यों मचा हंगामा
विधानसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत बोलते हुए संदीप सौरभ ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव की समस्या उठाई। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एससी, एसटी, ओबीसी समुदायों के छात्रों के साथ भेदभाव बढ़ रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने यूजीसी के 2026 नियमों को लागू करने की मांग की, जो जाति आधारित उत्पीड़न रोकने के लिए समानता समितियों का गठन अनिवार्य करते हैं।
सौरभ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर हाल ही में लगाई गई रोक ‘ब्राह्मणवादी सोच’ वाले लोगों की वजह से है, जो समानता को बढ़ावा देने वाले कदमों का विरोध करते हैं। उनकी इस टिप्पणी पर भाजपा और एनडीए के विधायक खड़े हो गए और विरोध जताया। सदन में शोर-शराबा बढ़ गया, जिसके बाद स्पीकर ने हस्तक्षेप किया और ‘ब्राह्मणवाद’ संबंधित शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने का निर्देश दिया।
सत्ता पक्ष का पलटवार, उप मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत अनुभव साझा किया
उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने माले विधायक की टिप्पणी को संवैधानिक संस्थाओं के अपमान के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि संविधान की शपथ लेने वाले लोग ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सिन्हा ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुजफ्फरपुर में तकनीकी शिक्षा के दौरान उन्हें भूमिहार-ब्राह्मण समाज से होने के बावजूद रैगिंग का शिकार होना पड़ा और हॉस्टल से निकाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि रैगिंग जैसी गलत मानसिकता हर समाज में हो सकती है, लेकिन पूरे समाज को दोषी ठहराना गलत है।
भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज शादी से लेकर श्राद्ध तक हर रस्म निभाता है और भगवान कृष्ण ने भी ब्राह्मण के पैर धोए थे। एक ब्राह्मण ने भिक्षा मांगकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने पूछा कि विपक्ष को ब्राह्मणों से इतनी परेशानी क्यों है?
विपक्ष का बचाव, राजद विधायक ने स्पष्ट किया
राजद के आलोक मेहता ने स्पष्ट किया कि संदीप सौरभ ने ब्राह्मण जाति नहीं, बल्कि ‘ब्राह्मणवाद’ की बात की थी। ब्राह्मणवाद यहां विचारधारा के रूप में इस्तेमाल हुआ है, जो जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि यूजीसी नियम उच्च शिक्षा में समानता लाने के लिए जरूरी हैं और इन पर रोक लगना दुर्भाग्यपूर्ण है।
यूजीसी नियम क्या हैं और सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई रोक
यूजीसी के 2026 नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकने के लिए लाए गए थे। इसमें मुख्य प्रावधान थे:
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हर संस्थान में इक्विटी कमेटी का गठन।
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मजबूत शिकायत निवारण तंत्र बनाना।
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जातिगत उत्पीड़न पर दंडात्मक कार्रवाई।
हालांकि, जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि नियम अस्पष्ट हैं और इनके दुरुपयोग की आशंका है। कोर्ट ने 2012 के पुराने नियमों को लागू रखने का आदेश दिया और केंद्र को नोटिस जारी किया।
Bihar Budget Session: बिहार में उच्च शिक्षा में भेदभाव का मुद्दा
बिहार में विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में जाति आधारित भेदभाव के आरोप अक्सर लगते रहे हैं। माले जैसे वामपंथी दल इसे व्यवस्थागत समस्या मानते हैं, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामाजिक एकता के खिलाफ बताता है। यह विवाद बिहार की राजनीति में जाति समीकरणों को फिर से उजागर करता है।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई। स्पीकर ने सभी दलों से शालीन भाषा अपनाने की अपील की। यह घटना बजट सत्र के दौरान हुई, जहां विकास और शिक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है।



