Bihar Politics: बिहार चुनाव हार के बाद RJD की नई रणनीति, तेजस्वी यादव ने घोषित किया बिहार से बाहर विस्तार, राष्ट्रीय पार्टी बनने का लक्ष्य
बिहार चुनाव हार के बाद RJD अब राष्ट्रीय पार्टी बनेगी, तेजस्वी यादव ने घोषित किया बिहार से बाहर विस्तार, सेक्युलर वोट एकजुट करने की रणनीति
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अब अपनी राजनीतिक रणनीति में बड़ा बदलाव कर रही है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने घोषणा की है कि RJD अब बिहार से बाहर भी अपना आधार मजबूत करेगी और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का विस्तार करेगी। तेजस्वी ने कहा कि पार्टी अब उन राज्यों में चुनाव लड़ने से परहेज नहीं करेगी, जहां पहले सहयोगियों की मदद के लिए ‘धर्मनिरपेक्ष वोटों’ के बंटवारे से बचने की नीति अपनाई जाती थी। यह फैसला पार्टी को नई दिशा देने और राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
तेजस्वी यादव ने यह घोषणा मंगलवार को पटना में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 38वीं पुण्यतिथि पर आयोजित एक कार्यक्रम में की। कर्पूरी ठाकुर को लालू प्रसाद यादव का राजनीतिक गुरु माना जाता है, और इस अवसर पर तेजस्वी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि मार्च से पार्टी को मजबूत करने की मुहिम शुरू होगी। उन्होंने लालू प्रसाद के योगदान को याद करते हुए कहा कि अब RJD को उनके काम को आगे बढ़ाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाना होगा।
हार से सबक: ‘हमारा समय जरूर आएगा’
बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को बड़ा झटका लगा था, जहां RJD मात्र 25 सीटों पर सिमट गई थी। तेजस्वी यादव ने इस हार को स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी कमजोर नहीं थी, बल्कि मुश्किल दौर से गुजर रही थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि हार के बावजूद हिम्मत न हारें, क्योंकि “हमारा समय जरूर आएगा”। तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद ने हाल ही में उन्हें RJD का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, और कार्यकर्ताओं के समर्थन से पार्टी नई ऊंचाइयों को छू सकती है।
तेजस्वी ने NDA सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ‘बेसुध’ बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार ब्यूरोक्रेट्स और BJP की ‘कठपुतली’ की तरह चल रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान किए गए कई वादे, जो RJD के विचारों से लिए गए थे, पूरे नहीं हो रहे हैं। तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि सरकार के 100 दिन पूरे होने की डेडलाइन चार दिनों में खत्म हो रही है, उसके बाद वे सत्ताधारी दल को जवाबदेह ठहराएंगे।
राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति: सेक्युलर वोटों का एकजुट होना
RJD की नई रणनीति का मुख्य फोकस बिहार से बाहर विस्तार पर है। तेजस्वी ने कहा कि पहले पार्टी उन राज्यों में चुनाव नहीं लड़ती थी जहां INDIA ब्लॉक के सहयोगी मजबूत थे, ताकि सेक्युलर वोटों में बंटवारा न हो। लेकिन अब यह नीति बदल रही है। पार्टी अन्य राज्यों में अपना बेस बढ़ाएगी और जहां संभव हो, वहां चुनाव लड़ेगी। यह कदम RJD को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा दिलाने में मदद कर सकता है, जो लंबे समय से पार्टी का सपना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार चुनाव में RJD को सबसे अधिक vote share मिला था (करीब 23%), लेकिन सीटें कम आने से हार हुई। सहयोगी दलों का कमजोर प्रदर्शन भी इसका कारण रहा। अब तेजस्वी की रणनीति में युवा ऊर्जा, सामाजिक न्याय और विकास के मुद्दों पर जोर दिया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने और जनता से जुड़ने का निर्देश दिया गया है।
Bihar Politics: चुनौतियां और भविष्य की राह
RJD के सामने कई चुनौतियां हैं। बिहार में NDA की मजबूत सरकार है, और तेजस्वी को विपक्ष के रूप में आक्रामक रुख अपनाना होगा। साथ ही, पार्टी के भीतर एकजुटता बनाए रखना और युवा नेतृत्व को मजबूत करना जरूरी है। तेजस्वी की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा अच्छी है, लेकिन अन्य राज्यों में RJD की पैठ कम है। यहां सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर फोकस करके नए वोट बैंक बनाने की जरूरत है।
तेजस्वी यादव ने कार्यकर्ताओं को विश्वास दिलाया कि पार्टी मजबूत होकर उभरेगी। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है, लेकिन कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों पर चलकर इसे साकार किया जाएगा। आने वाले महीनों में RJD की गतिविधियां बढ़ेंगी, और मार्च से संगठनात्मक अभियान तेज होगा।
यह बदलाव न केवल RJD के लिए, बल्कि बिहार और राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है। तेजस्वी की नई रणनीति से देखना होगा कि क्या पार्टी हार से उबरकर नई ऊंचाइयों को छू पाती है। फिलहाल, तेजस्वी यादव का संदेश साफ है – RJD अब बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी।



