Bihar News: बिहार रेलवे में नई उड़ान, बेतिया-कुमारबाग डबल ट्रैक पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार से सफल परीक्षण
बिहार में सगौली-वाल्मीकिनगर दोहरीकरण परियोजना के तहत बेतिया-कुमारबाग 9 किमी खंड पर 120 किमी/घंटा की सफल स्पीड ट्रायल, CRS निरीक्षण पूरा, जल्द व्यावसायिक संचालन
Bihar News: बिहार के रेल नेटवर्क में एक और मील का पत्थर जुड़ गया है। पूर्व मध्य रेलवे की महत्वाकांक्षी सगौली-वाल्मीकिनगर दोहरीकरण परियोजना के तहत बेतिया और कुमारबाग के बीच नवनिर्मित डबल ट्रैक पर मंगलवार को उच्च गति परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) ने इस 9 किलोमीटर लंबे खंड पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन चलाकर सुरक्षा मानकों की जांच की। यह कदम राज्य में रेल यात्रा को तेज, सुरक्षित और कुशल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है, जो यात्री और माल ढुलाई दोनों को लाभ पहुंचाएगा।
इस परीक्षण के दौरान विशेष ट्रेन ने बिना किसी बाधा के निर्धारित गति हासिल की, जो रेलवे इंजीनियरिंग की मजबूती को दर्शाता है। मंडल रेल प्रबंधक और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम ने स्थानीय लोगों में उत्साह पैदा किया है। आइए जानते हैं इस परियोजना के बारे में विस्तार से और इसके दूरगामी प्रभावों को।
निरीक्षण और स्पीड ट्रायल की पूरी प्रक्रिया
रेलवे सुरक्षा आयुक्त पूर्वी सर्किल, गुरु प्रकाश के नेतृत्व में इस निरीक्षण को अंजाम दिया गया। सबसे पहले मोटर ट्रॉली के माध्यम से ट्रैक की हर बारीकी पर नजर डाली गई। इसमें सिग्नल सिस्टम, ब्रिज, क्रॉसिंग और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच शामिल थी। आयुक्त ने सुनिश्चित किया कि सभी मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुरूप हैं, ताकि भविष्य में कोई दुर्घटना की आशंका न रहे।
इसके बाद कुमारबाग से बेतिया स्टेशन की ओर विशेष ट्रेन को रवाना किया गया। ट्रेन ने धीरे-धीरे गति पकड़ी और 120 किमी/घंटा की रफ्तार तक पहुंची। इस दौरान वाइब्रेशन, ट्रैक स्थिरता और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की मॉनिटरिंग की गई। परीक्षण पूरी तरह सफल रहा, जिससे इस खंड को जल्द ही व्यावसायिक संचालन के लिए हरी झंडी मिलने की उम्मीद है। पूर्व मध्य रेलवे के समस्तीपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक ज्योति प्रकाश मिश्रा ने बताया कि यह निरीक्षण रेलवे की सुरक्षा प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
यह प्रक्रिया न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है। ऐसे परीक्षणों से ट्रेनों की औसत गति बढ़ती है, जो यात्रियों के समय की बचत करता है।
सगौली-वाल्मीकिनगर दोहरीकरण परियोजना का अवलोकन
यह परियोजना बिहार के उत्तरी भाग में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए शुरू की गई थी। कुल 110 किलोमीटर लंबी इस योजना का उद्देश्य सिंगल ट्रैक को डबल ट्रैक में बदलना है, ताकि ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सके और देरी कम हो। अब तक 82 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका था, और बेतिया-कुमारबाग के 9 किलोमीटर खंड के साथ कुल 91 किलोमीटर का दोहरीकरण हो गया है।
परियोजना की शुरुआत 2010 के दशक में हुई थी, जब बिहार में रेल यातायात की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दी। निर्माण कार्य में कई चुनौतियां आईं, जैसे भूमि अधिग्रहण, मौसम की मार और महामारी का प्रभाव, लेकिन रेलवे ने समयबद्ध तरीके से इसे आगे बढ़ाया। इस खंड में आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल और इलेक्ट्रिफिकेशन शामिल है, जो ऊर्जा कुशलता को बढ़ावा देता है।
बिहार सरकार भी इस परियोजना में सहयोग कर रही है, क्योंकि यह राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। वाल्मीकिनगर क्षेत्र पर्यटन के लिए जाना जाता है, जहां वाल्मीकि टाइगर रिजर्व स्थित है। डबल ट्रैक से पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जो स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देगा।
रेलवे सुरक्षा और तकनीकी उन्नयन का महत्व
रेलवे में सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता रही है। सीआरएस निरीक्षण इसी का हिस्सा है, जो किसी भी नए ट्रैक या संशोधन से पहले अनिवार्य होता है। भारत में रेल दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कवच सिस्टम जैसी तकनीकें अपनाई जा रही हैं, और इस परियोजना में भी ऐसी सुविधाओं को शामिल किया गया है। 120 किमी/घंटा की गति परीक्षण से पता चलता है कि ट्रैक हाई-स्पीड ऑपरेशन के लिए तैयार है, लेकिन वास्तविक संचालन में गति को यात्री सुरक्षा के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
पूर्व मध्य रेलवे ने हाल के वर्षों में कई ऐसी परियोजनाएं पूरी की हैं, जैसे पटना-मुगलसराय खंड का इलेक्ट्रिफिकेशन और नई दिल्ली-हावड़ा रूट पर सेमी-हाई स्पीड ट्रेनें। ये प्रयास देश की रेलवे को बुलेट ट्रेन युग की ओर ले जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दोहरीकरण से ट्रेनों की क्षमता 30-40 प्रतिशत बढ़ सकती है, जो माल ढुलाई में विशेष रूप से उपयोगी होगा। बिहार से गुजरने वाली मालगाड़ियां अब कम समय में गंतव्य पहुंचेंगी, जो कृषि उत्पादों और उद्योगों को लाभ देगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और विकास पर प्रभाव
बेतिया और कुमारबाग जैसे क्षेत्रों में यह परियोजना स्थानीय विकास को गति देगी। बेतिया जिला चीनी उद्योग और कृषि के लिए प्रसिद्ध है, जहां से बड़ी मात्रा में गन्ना और अनाज का निर्यात होता है। डबल ट्रैक से माल ढुलाई तेज होगी, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकेगी। साथ ही, यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जैसे स्टेशन पर वेंडर, टैक्सी सेवाएं और होटल।
वाल्मीकिनगर की ओर जाने वाली ट्रेनें अब बिना देरी के चलेंगी, जो नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र को पर्यटन हब बना सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहले सिंगल ट्रैक के कारण ट्रेनें घंटों लेट होती थीं, लेकिन अब स्थिति सुधरेगी। सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत ऐसी परियोजनाएं स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा दे रही हैं, जहां निर्माण सामग्री और मजदूर स्थानीय स्तर से लिए जा रहे हैं।
इसके अलावा, पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह फायदेमंद है। इलेक्ट्रिक ट्रेनें डीजल की खपत कम करेंगी, जो कार्बन उत्सर्जन को घटाएगा। रेलवे ने इस परियोजना में हरे-भरे क्षेत्रों को संरक्षित रखने के लिए विशेष कदम उठाए हैं, जैसे वन क्षेत्रों में अंडरपास बनाना।
भविष्य की योजनाएं और चुनौतियां
पूर्व मध्य रेलवे की योजना है कि शेष 19 किलोमीटर का काम जल्द पूरा कर लिया जाए, ताकि पूरी परियोजना 2026 के अंत तक चालू हो। इसके बाद सगौली से वाल्मीकिनगर तक हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने रेल बजट में बिहार के लिए अतिरिक्त फंड आवंटित किया है, जो अन्य परियोजनाओं जैसे पटना-गया डबलिंग को गति देगा।
हालांकि, चुनौतियां भी हैं। भूमि अधिग्रहण में देरी, बजट की कमी और श्रमिकों की उपलब्धता जैसे मुद्दे सामने आते रहते हैं। लेकिन रेल मंत्री के नेतृत्व में इनका समाधान किया जा रहा है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम से प्रोजेक्ट ट्रैकिंग को और बेहतर बनाया जाए।
यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘विकसित भारत’ विजन का हिस्सा है, जहां बुनियादी ढांचा विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। बिहार जैसे राज्य, जो आर्थिक रूप से पिछड़े माने जाते हैं, ऐसी योजनाओं से मुख्यधारा में जुड़ रहे हैं।
Bihar News: एक नई शुरुआत
बेतिया-कुमारबाग खंड का सफल स्पीड ट्रायल बिहार रेलवे के लिए एक नई शुरुआत है। यह न केवल यात्रा को तेज बनाएगा, बल्कि आर्थिक विकास, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस ट्रैक पर नई ट्रेनें शुरू की जाएंगी, जो पटना से नेपाल बॉर्डर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करेंगी। स्थानीय लोग इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं, और उम्मीद है कि इससे राज्य की समृद्धि बढ़ेगी।



