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Bihar News: बिहार में रबी सीजन की गेहूं खरीद जल्द शुरू, किसानों को मिलेगा बढ़ा हुआ एमएसपी लाभ

बिहार में 15 अप्रैल से गेहूं की एमएसपी खरीद शुरू, 2585 रुपये प्रति क्विंटल (160 रुपये बढ़ोतरी), सिवान से शुरुआत, dbtagriculture.bihar.gov.in पर पंजीकरण जारी

Bihar News: बिहार के किसानों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद की तैयारी पूरी कर ली है। सिवान जिले से शुरुआत करते हुए 15 अप्रैल से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीद शुरू हो जाएगी। इस बार एमएसपी को बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जो पिछले साल की तुलना में 160 रुपये अधिक है। यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। राज्य भर में सहकारिता विभाग ने क्रय केंद्रों की व्यवस्था शुरू कर दी है, ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।

बिहार, जो कृषि प्रधान राज्य है, में गेहूं की पैदावार हमेशा से अर्थव्यवस्था की रीढ़ रही है। इस साल मौसम की अनुकूलता के कारण फसल की अच्छी उपज की उम्मीद है, जिससे किसानों में उत्साह है। सरकार की यह पहल न केवल किसानों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाएगी, बल्कि उन्हें उचित मूल्य सुनिश्चित करेगी। आइए जानते हैं इस खरीद प्रक्रिया के बारे में विस्तार से।

किसानों के लिए एमएसपी में वृद्धि: एक बड़ा राहत पैकेज

बिहार सरकार ने केंद्र के सहयोग से गेहूं की एमएसपी में इस साल उल्लेखनीय वृद्धि की है। पिछले रबी सीजन में एमएसपी 2425 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि अब इसे 2585 रुपये कर दिया गया है। यह 160 रुपये की बढ़ोतरी किसानों की लागत बढ़ने को ध्यान में रखते हुए की गई है। उर्वरक, बीज और सिंचाई की बढ़ती कीमतों के बीच यह फैसला किसानों के लिए संजीवनी बूटी की तरह है।

सहकारिता विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह वृद्धि किसानों की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से जुड़ी है। बिहार में जहां अधिकांश किसान छोटे और सीमांत हैं, वहां एमएसपी पर खरीद उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाती है। सिवान जिले के जिला सहकारिता पदाधिकारी सौरभ कुमार ने बताया कि “इस साल की एमएसपी वृद्धि से किसानों में नई ऊर्जा आएगी। हमने खरीद केंद्रों को पूरी तरह तैयार कर लिया है, ताकि नमी मापने, तौल और भुगतान में कोई देरी न हो।”

राज्य स्तर पर देखें तो बिहार में गेहूं की कुल पैदावार लगभग 60 लाख मीट्रिक टन होने का अनुमान है। यदि उत्पादन लक्ष्य के अनुरूप रहा, तो खरीद की मात्रा भी बढ़ सकती है। हालांकि, अभी आधिकारिक लक्ष्य घोषित नहीं किया गया है, लेकिन विभाग का अनुमान है कि सिवान जैसे जिलों में 50 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं की खरीद हो सकती है। यह प्रक्रिया न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देगी, बल्कि खाद्यान्न सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।

ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया: आसान और पारदर्शी तरीका

गेहूं बेचने के इच्छुक किसानों को अब घर बैठे पंजीकरण कराना होगा। बिहार कृषि विभाग के पोर्टल dbtagriculture.bihar.gov.in पर 21 जनवरी से ही रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है। यह डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) आधारित प्रणाली है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। किसान अपने आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण और फसल संबंधी जानकारी अपलोड करके आवेदन कर सकते हैं।

पोर्टल पर पंजीकरण के बाद किसानों को एसएमएस के माध्यम से क्रय केंद्र और तारीख की जानकारी मिलेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाती है और किसान सीधे सरकारी केंद्रों पर फसल बेच सकेंगे। सिवान के एक किसान रामेश्वर यादव ने कहा, “पिछले साल पंजीकरण में थोड़ी देरी हुई थी, लेकिन इस बार प्रक्रिया सुगम लग रही है। एमएसपी बढ़ने से हमारी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा।”

बिहार सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि पंजीकरण प्रक्रिया ग्रामीण क्षेत्रों में भी पहुंच योग्य हो। पंचायत स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां किसान इंटरनेट न होने पर भी मदद ले सकते हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान से जुड़ा है, जो किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाता है। राज्य में लगभग 10 लाख किसान इस योजना से लाभान्वित होने की उम्मीद है।

क्रय केंद्रों की तैयारी “नमी, तौल और भुगतान पर फोकस”

सहकारिता विभाग ने राज्य भर में क्रय केंद्रों की सूची तैयार कर ली है। सिवान जिले में पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी) और व्यापार मंडलों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन केंद्रों पर गेहूं की नमी की अधिकतम सीमा 14 प्रतिशत निर्धारित की गई है, ताकि फसल की गुणवत्ता बनी रहे। यदि नमी अधिक हुई, तो किसानों को सुखाने की सलाह दी जाएगी।

तौल प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक स्केल से होगी, जो पारदर्शी और सटीक है। भुगतान की व्यवस्था भी तेज की गई है। किसानों को 48 घंटे के अंदर डीबीटी के माध्यम से पैसा मिल जाएगा। यह प्रणाली पिछले साल की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए सुधारी गई है, जहां कुछ जिलों में भुगतान में देरी हुई हुई थी।

बिहार के कृषि मंत्री ने हाल ही में एक बैठक में कहा कि “हमारी प्राथमिकता है कि किसान को उसकी फसल का पूरा मूल्य मिले, बिना किसी कटौती के। क्रय केंद्रों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जैसे पानी, छाया और सहायता स्टाफ।” सिवान में लगभग 20 क्रय केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जो जिले के विभिन्न ब्लॉकों को कवर करेंगे।

मौसम अनुकूलता और पैदावार की संभावनाएं

इस साल बिहार में रबी फसलों के लिए मौसम बेहद अनुकूल रहा है। समय पर बारिश और ठंड ने गेहूं की वृद्धि को बढ़ावा दिया। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि प्रति हेक्टेयर उपज 40-45 क्विंटल तक हो सकती है, जो औसत से अधिक है। सिवान जिले में, जहां गंगा की उपजाऊ भूमि है, पैदावार और भी बेहतर होने की उम्मीद है।

कृषि विभाग के पदाधिकारियों का मानना है कि यदि पैदावार अनुमान के अनुरूप रही, तो खरीद लक्ष्य को बढ़ाया जा सकता है। पिछले साल बिहार में कुल 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी, और इस साल इसे 30 लाख तक ले जाने का लक्ष्य है। यह न केवल किसानों को लाभ देगा, बल्कि राज्य की खाद्यान्न भंडारण क्षमता को भी मजबूत करेगा।

हालांकि, कुछ चुनौतियां भी हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण कभी-कभी अप्रत्याशित मौसम फसल को प्रभावित कर सकता है। लेकिन सरकार ने बीमा योजनाओं जैसे पीएम फसल बीमा को बढ़ावा दिया है, जो किसानों को सुरक्षा प्रदान करती है।

बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

बिहार की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान 25 प्रतिशत से अधिक है। गेहूं खरीद जैसी योजनाएं न केवल किसानों की आय बढ़ाती हैं, बल्कि ग्रामीण विकास को भी गति देती हैं। एमएसपी पर खरीद से प्राप्त धन किसान नई फसलों, उपकरणों और शिक्षा पर खर्च करते हैं, जो चक्रवृद्धि प्रभाव पैदा करता है।

राज्य सरकार ने हाल के बजट में कृषि के लिए 5000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें एमएसपी खरीद शामिल है। यह केंद्र की किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ा है, जो किसानों को वार्षिक 6000 रुपये प्रदान करती है। सिवान जैसे जिलों में, जहां कृषि मुख्य रोजगार है, यह योजना बेरोजगारी कम करने में मदद करेगी।

किसान संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है। बिहार किसान संघ के एक प्रतिनिधि ने कहा, “एमएसपी वृद्धि अच्छी है, लेकिन हमें और अधिक क्रय केंद्रों की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी बढ़ानी चाहिए।” सरकार ने इन सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया है।

Bihar News: आगे की चुनौतियां और सुझाव

हालांकि योजना अच्छी है, लेकिन क्रियान्वयन में कुछ चुनौतियां हैं। पिछले साल कुछ जिलों में नमी के कारण खरीद प्रभावित हुई थी। इसलिए, किसानों को फसल सुखाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। साथ ही, पोर्टल पर पंजीकरण में तकनीकी समस्याओं को दूर करने की जरूरत है।

कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान उन्नत बीजों का उपयोग करें और जैविक खेती को अपनाएं, ताकि पैदावार बढ़े। बिहार सरकार ने इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, जैसे मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड और सिंचाई योजनाएं।

कुल मिलाकर, यह गेहूं खरीद अभियान बिहार के किसानों के लिए एक नई शुरुआत है। यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था नई ऊंचाइयों को छूएगी। किसानों से अपील है कि वे समय पर पंजीकरण करें और इस अवसर का लाभ उठाएं।

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