Bihar News: बिहार में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाई देने वाली बड़ी परियोजना, बैद्यनाथ-पशुपतिनाथ हाई-स्पीड कॉरिडोर का प्रस्ताव
बिहार-नेपाल धार्मिक पर्यटन क्रांति: 8000 करोड़+ की परियोजना, सुल्तानगंज-अगुवानी गंगा पुल केंद्र में, श्रावणी मेला यात्रा 3-4 घंटे में।
Bihar News: बिहार सरकार धार्मिक आस्था और सीमा-पार संपर्क को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम कर रही है। यह परियोजना नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर को झारखंड के बैद्यनाथ धाम से जोड़ेगी, जिससे श्रावणी मेला जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में श्रद्धालुओं की यात्रा आसान और सुरक्षित हो जाएगी। सुल्तानगंज-अगुवानी घाट गंगा पुल को इस कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा, जो लाखों कांवरियों की पदयात्रा को नई दिशा देगा।
यह प्रस्तावित हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्रों से होकर गुजरेगा और नेपाल के काठमांडू तक पहुंचेगा। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन में वृद्धि होगी, बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
श्रावणी मेला के श्रद्धालुओं के लिए वरदान साबित होगा कॉरिडोर
श्रावणी मेला बिहार और झारखंड के लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक आयोजन है। सावन मास में सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ मंदिर से गंगाजल लेकर कांवरिए पैदल देवघर के बैद्यनाथ धाम तक जाते हैं। वर्तमान में यह यात्रा कई चुनौतियों से भरी होती है, जैसे भीड़, सड़क जाम और दुर्घटनाओं का खतरा।
प्रस्तावित बैद्यनाथ-पशुपतिनाथ कॉरिडोर इन समस्याओं का स्थायी समाधान लाएगा। यह मार्ग सुल्तानगंज, अगुवानी घाट, पसराहा, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जैसे इलाकों से होकर गुजरेगा। इससे कांवरियों को सुरक्षित और तेज यात्रा मिलेगी। साथ ही, मधेपुरा के सिंहेश्वर स्थान मंदिर जैसे अन्य धार्मिक स्थलों को भी सीधा लाभ होगा।
बिहार सरकार ने इस कॉरिडोर को ग्रीनफील्ड आधार पर विकसित करने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि ज्यादातर हिस्सा नई जमीन पर बनेगा, जबकि कुछ मौजूदा सड़कों का उपयोग और उन्नयन किया जाएगा। इससे यात्रा समय काफी कम हो जाएगा और सुरक्षा मानकों में सुधार होगा।
कॉरिडोर की लंबाई, लागत और निर्माण की रूपरेखा
बिहार के सुपौल जिले के भीमनगर से शुरू होकर बांका जिले के चानन तक यह कॉरिडोर लगभग 225 किलोमीटर लंबा होगा। आगे यह नेपाल के काठमांडू तक विस्तारित होगा, जिससे कुल दूरी करीब 250 किलोमीटर बताई जा रही है। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, इस परियोजना पर अनुमानित 8000 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा।
परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) जल्द तैयार किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, अगस्त महीने तक डीपीआर पूरा होने की संभावना है। कॉरिडोर में से करीब 30 प्रतिशत हिस्सा मौजूदा सड़कों पर आधारित होगा, जबकि 70 प्रतिशत के लिए नई जमीन अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। इससे स्थानीय स्तर पर भूमि मालिकों को मुआवजा मिलेगा और विकास की प्रक्रिया तेज होगी।
इस कॉरिडोर से झारखंड के देवघर जिले में स्थित बैद्यनाथ धाम सीधे नेपाल से जुड़ जाएगा। यात्रा का समय वर्तमान 13 घंटे से घटकर मात्र 3-4 घंटे रह जाएगा, जो धार्मिक पर्यटकों के लिए क्रांतिकारी बदलाव होगा।
अगुवानी-सुल्तानगंज गंगा पुल: कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा
इस परियोजना का केंद्र बिंदु सुल्तानगंज-अगुवानी घाट गंगा पुल है। यह पुल 1710 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है और इसे 18 महीने में पूरा करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने हाल ही में समीक्षा बैठक में परियोजना की प्रगति का जायजा लिया।
बैठक में एप्रोच पथ का आधे से अधिक काम पूरा होने की जानकारी दी गई। दो स्थानों पर आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माणाधीन हैं, जबकि रेलवे हिस्से का कार्य बाकी है। सचिव ने स्पष्ट किया कि समय-सीमा में काम पूरा न होने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई होगी। यह पुल न केवल गंगा को पार करने का माध्यम बनेगा, बल्कि पूरे कॉरिडोर की रीढ़ होगा।
धार्मिक पर्यटन के साथ आर्थिक विकास को मिलेगा बल
यह कॉरिडोर केवल धार्मिक महत्व का नहीं है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी अहम है। बेहतर सड़क संपर्क से कोसी, सीमांचल और बांका क्षेत्रों में व्यापार बढ़ेगा। बांका के ओढ़नी डेम, चानन डेम और हनुमाना डेम जैसे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा।
विदेशी पर्यटक भी इस मार्ग से पशुपतिनाथ और बैद्यनाथ धाम की यात्रा कर सकेंगे, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान मजबूत होगा। श्रावणी मेला के दौरान भीड़ प्रबंधन आसान होगा और दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, जैसे होटल, ट्रांसपोर्ट, गाइड और छोटे व्यवसाय।
बिहार सरकार की यह पहल ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जुड़ी है। सड़क निर्माण विभाग ने 2026-27 के बजट में ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है। मंत्री दिलीप कुमार जैसवाल ने विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह कॉरिडोर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ क्षेत्रीय एकीकरण करेगा।
पर्यावरण और स्थानीय समुदाय पर प्रभाव
ग्रीनफील्ड कॉरिडोर होने के कारण पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पेड़-पौधों का रोपण और जैव-विविधता संरक्षण की योजना शामिल होगी। स्थानीय समुदायों से विचार-विमर्श कर जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
यह परियोजना भारत-नेपाल संबंधों को भी मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच पहले से ही सांस्कृतिक और धार्मिक जुड़ाव है, जो अब बुनियादी ढांचे के स्तर पर मजबूत होगा।
Bihar News: निष्कर्ष
निष्कर्ष में, बैद्यनाथ-पशुपतिनाथ हाई-स्पीड कॉरिडोर बिहार के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। यह न केवल श्रावणी मेला की भव्यता बढ़ाएगा, बल्कि पूरे क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा। सरकार की तेजी से काम करने की मंशा से यह परियोजना निर्धारित समय पर पूरी होने की उम्मीद है। श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इस बदलाव का स्वागत कर रहे हैं।



