बिहार
Trending

PM Kisan Samman Yojana: जमुई में फार्मर आईडी न बनने से हजारों किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना पर मंडरा रहा संकट

3.26 लाख लाभार्थियों में से केवल 64 हजार की आईडी बनी, आगामी किस्तें खतरे में, भूमि रिकॉर्ड विसंगति मुख्य कारण। किसान चिंतित।

PM Kisan Samman Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम किसान) के तहत देश भर के करोड़ों किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है, लेकिन बिहार के जमुई जिले में फार्मर आईडी (किसान आईडी) निर्माण की प्रक्रिया धीमी पड़ने से हजारों किसानों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। सरकारी दिशानिर्देशों के अनुसार अब योजना के लाभ के लिए फार्मर आईडी अनिवार्य हो गई है, जिसके बिना आगामी किस्तें प्रभावित हो सकती हैं। जिले में लाखों किसान इस डिजिटल पहचान से वंचित हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ सकता है।

फार्मर आईडी क्यों बनी अनिवार्य, जानिए पूरा मामला

पीएम किसान योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जो छोटे और सीमांत किसानों को सीधे बैंक खाते में 2,000 रुपये की तीन किस्तों में सहायता प्रदान करती है। 2026 में इस योजना के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब लाभार्थियों के लिए यूनिक फार्मर आईडी प्राप्त करना जरूरी हो गया है, खासकर उन राज्यों में जहां किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बिहार इनमें शामिल है, जहां एग्री स्टैक के तहत फार्मर रजिस्ट्री चल रही है।

इस आईडी का उद्देश्य किसानों की डिजिटल पहचान बनाना, डुप्लिकेशन रोकना और सरकारी योजनाओं का पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है। सरकारी पोर्टल और हालिया अपडेट्स के मुताबिक, फार्मर आईडी के बिना न केवल नई रजिस्ट्रेशन बल्कि मौजूदा लाभार्थियों की आगामी किस्तें भी प्रभावित हो सकती हैं। विशेष रूप से 22वीं किस्त (फरवरी-मार्च 2026 के बीच संभावित) के लिए e-केवाईसी के साथ फार्मर आईडी की अनिवार्यता पर जोर दिया जा रहा है।

जमुई जिले में स्थिति चिंताजनक, आंकड़े बताते हैं हकीकत

जमुई जिले में पीएम किसान योजना के तहत करीब 3 लाख 26 हजार किसान लाभ प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन फार्मर आईडी निर्माण की प्रगति बेहद धीमी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक मात्र 64,859 किसानों की ही फार्मर आईडी बन पाई है। जिले में कुल 7.47 लाख किसानों के नाम जमीन जमाबंदी दर्ज है, यानी अधिकांश किसान अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।

जिले के विभिन्न प्रखंडों में स्थिति और भी खराब है। उदाहरण के लिए:

  • चकाई प्रखंड में कुल पीएम किसान लाभार्थी 58,753 हैं, लेकिन फार्मर आईडी सिर्फ 8,278 किसानों की बनी है।

  • झाझा में 49,190 लाभार्थियों में से मात्र 6,647 की आईडी तैयार हुई।

  • खैरा, सोनो और अन्य प्रखंडों में भी यही हाल है, जहां 20-30 प्रतिशत से कम प्रगति दर्ज की गई।

ऐसे में 50 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी योजना से बाहर हो सकते हैं, अगर समय रहते समस्या का समाधान नहीं निकाला गया।

पूर्वजों के नाम दर्ज भूमि और नाम में विसंगति

फार्मर आईडी न बन पाने का सबसे बड़ा कारण भूमि रिकॉर्ड में पुरानी समस्याएं हैं। अधिकांश किसानों की जमीन अभी भी पूर्वजों (दादा-परदादा) के नाम पर दर्ज है। नियमों के मुताबिक, फार्मर आईडी उसी किसान के नाम पर बनती है, जिसके नाम भूमि रसीद कट रही हो और जमाबंदी अपडेटेड हो।

इसके अलावा:

  • आधार कार्ड और भूमि रसीद में नाम का मिलान न होना (करीब 15 प्रतिशत मामलों में)।

  • मोबाइल नंबर में विसंगति या पंजीकरण न होना।

  • कई किसान रोजगार की तलाश में बाहर रहते हैं, जिससे प्रक्रिया में भाग नहीं ले पाते।

  • वंशावली के आधार पर नाम दर्ज कराने वाले किसानों की आईडी वैरिफिकेशन में अड़चन।

ये मुद्दे न केवल जमुई बल्कि पूरे बिहार में देखे जा रहे हैं, जहां लाखों किसान प्रभावित हैं।

विभागीय प्रयास जारी, लेकिन चुनौतियां बरकरार

जमुई के कृषि विभाग, राजस्व कर्मचारी, किसान सलाहकार और रोजगार सेवक घर-घर जाकर फार्मर आईडी बनाने का अभियान चला रहे हैं। प्रखंड कृषि पदाधिकारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि विभाग दिन-रात प्रयासरत है, लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी समस्याओं के कारण प्रगति धीमी है। उन्होंने कहा, “सरकार से नई गाइडलाइंस का इंतजार है। छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान फिलहाल मुश्किल है, लेकिन प्रयास जारी रहेंगे।”

एडीएम रविकांत सिन्हा ने किसानों से अपील की है कि वे तुरंत e-केवाईसी पूरा करें और फार्मर आईडी बनवाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना इनके सरकारी लाभ मिलना मुश्किल हो जाएगा।

किसानों की चिंता और मांग

जमुई के किसानों में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय किसान शैलेश कुमार माथुरी ने कहा, “सरकार को पूर्वजों के नाम वाली भूमि पर भी फार्मर आईडी बनाने की छूट देनी चाहिए। सहायता राशि नहीं रोकी जानी चाहिए, वरना हमारी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाएगी।”

जिला पार्षद सह किसान धर्मदेव यादव ने भी मांग की कि नियमों में लचीलापन लाया जाए, क्योंकि जमुई पिछड़ा क्षेत्र है और यहां दस्तावेज अपडेट कराना मुश्किल होता है।

PM Kisan Samman Yojana: क्या है आगे का रास्ता?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जल्द ही दिशानिर्देश जारी करने चाहिए, जिसमें भूमि ट्रांसफर की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए या वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। बिहार में फार्मर रजिस्ट्री पोर्टल (bhfr.agristack.gov.in) के माध्यम से प्रक्रिया चल रही है, जहां किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

किसानों को सलाह है कि वे निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), कृषि कार्यालय या राजस्व विभाग से संपर्क करें। पीएम किसान पोर्टल (pmkisan.gov.in) पर स्टेटस चेक करें और e-केवाईसी पूरा करें। अगर फार्मर आईडी नहीं बनी तो आगामी किस्तें रुक सकती हैं, जिससे लाखों परिवार प्रभावित होंगे।

यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य का हिस्सा है, लेकिन डिजिटल ट्रांजिशन में अगर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो इसका उद्देश्य अधूरा रह सकता है। सरकार और प्रशासन से अपेक्षा है कि वे किसानों की चिंताओं को सुनें और त्वरित कदम उठाएं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button