VBGRAMG: बिहार में मनरेगा के 125 दिन के काम की गारंटी और देरी पर मुआवजा, नए नियम लागू, जिला प्रशासन ने जारी किया आदेश
कैमूर जिले में लागू नए नियम, 125 दिन रोजगार, 15 दिन में काम नहीं तो बेरोजगारी भत्ता, देरी पर मुआवजा अनिवार्य।
VBGRAMG: बिहार के कैमूर जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत अब मजदूरों को 125 दिनों तक काम की गारंटी मिलेगी। साथ ही काम में देरी होने पर मुआवजा भी अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने इस संबंध में नए नियम लागू कर दिए हैं। यह फैसला ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी कम करने और मनरेगा योजना को अधिक प्रभावी बनाने के लिए लिया गया है।
जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) और मनरेगा सेल ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के अनुसार अब हर पात्र परिवार को वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा। पहले यह सीमा 100 दिन थी। केंद्र सरकार की नई गाइडलाइन के बाद बिहार सरकार ने भी इसे लागू करने का निर्णय लिया है। कैमूर जिला प्रशासन ने इसे तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है।
VBGRAMG: 125 दिन काम की गारंटी कैसे मिलेगी?
नए नियमों के तहत ग्रामीण परिवारों को निम्नलिखित आधार पर 125 दिन का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा:
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हर पात्र परिवार को जॉब कार्ड पर कम से कम 125 दिन का काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
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यदि किसी परिवार को 125 दिन से कम काम मिलता है तो जिला प्रशासन को कारण बताना होगा।
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काम की मांग करने पर 15 दिनों के अंदर काम उपलब्ध कराना होगा।
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यदि 15 दिन में काम नहीं दिया गया तो परिवार को बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।
यह व्यवस्था उन परिवारों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगी जो खेती के अलावा अन्य रोजगार के साधन नहीं रखते। कैमूर जैसे जिले में जहां अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं, मनरेगा के जरिए अतिरिक्त रोजगार बहुत जरूरी है।
काम में देरी पर मुआवजा अनिवार्य
मनरेगा के तहत काम में देरी होने पर अब मुआवजा देना अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार:
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जॉब कार्ड धारक ने काम की मांग की और 15 दिनों के अंदर काम नहीं मिला तो उसे प्रतिदिन 100-200 रुपये तक का बेरोजगारी भत्ता मिलेगा।
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काम शुरू होने के बाद यदि हर हफ्ते समय पर मजदूरी नहीं मिलती तो देरी के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा।
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मजदूरी भुगतान में 15 दिन से ज्यादा की देरी पर 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से जुर्माना लगेगा।
यह मुआवजा सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। जिला प्रशासन ने सभी ब्लॉक विकास अधिकारियों (BDO) और मनरेगा प्रभारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस नियम का सख्ती से पालन करें।
कैमूर जिले में मनरेगा की स्थिति
कैमूर जिला प्रशासन ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में अब तक औसतन 45-50 दिनों का रोजगार दिया जा चुका है। नए नियम लागू होने से अब हर पात्र परिवार को कम से कम 125 दिन का काम मिल सकेगा। जिले में कुल 1 लाख 20 हजार से ज्यादा जॉब कार्ड हैं। इनमें से अधिकांश सक्रिय हैं।
प्रशासन का दावा है कि नए नियमों से मजदूरों की आय में बढ़ोतरी होगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की गति भी बढ़ेगी। सड़कें, तालाब, नहरें, चेकडैम और अन्य सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण तेज होगा।
मजदूरों और अधिकारियों की जिम्मेदारी
नए नियमों में मजदूरों और अधिकारियों दोनों की जिम्मेदारी तय की गई है:
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मजदूरों को समय पर काम की मांग करनी होगी और काम पूरा करने के बाद हाजिरी नियमित रूप से लगवानी होगी।
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अधिकारी काम की मांग पर 15 दिनों के अंदर काम शुरू करवाएंगे।
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मजदूरी भुगतान समय पर नहीं होने पर मुआवजा देना अनिवार्य होगा।
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सभी कार्यों का सोशल ऑडिट अनिवार्य होगा।
प्रशासन ने सभी ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक मजदूर योजना का लाभ उठा सकें।
किसानों और मजदूरों के लिए राहत
कैमूर जैसे जिले में जहां खेती मुख्य आजीविका है, मनरेगा मजदूरों के लिए अतिरिक्त आय का बड़ा स्रोत है। 125 दिन की गारंटी और देरी पर मुआवजा मिलने से मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही ग्रामीण विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।
जिला प्रशासन ने कहा कि नए नियमों का सख्ती से पालन होगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मजदूरों से अपील की गई है कि वे समय पर काम की मांग करें और योजना का पूरा लाभ उठाएं।



