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Bihar News: बिहार में मछली पालकों के लिए डिजिटल पहचान पत्र अनिवार्य, सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ, कैमूर जिले में 9000 रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य

नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन जरूरी, कैमूर में 9000 का लक्ष्य, अभी 3971 पूरा। सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ।

Bihar News: बिहार में मछली पालन करने वाले किसानों और इससे जुड़े व्यवसायियों के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब किसी भी मत्स्य संबंधी सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। इस रजिस्ट्रेशन के बाद मछली पालकों को डिजिटल पहचान पत्र जारी किया जा रहा है। इससे योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।

कैमूर जिले में इस अभियान को लेकर तेजी से काम चल रहा है। मत्स्य प्रसार पदाधिकारी अभय गुप्ता ने बताया कि जिले में मछली पालन और इससे जुड़े व्यवसायों को संगठित और डिजिटल बनाने के लिए केंद्र सरकार की यह पहल बहुत उपयोगी साबित होगी। जिले को 9000 डिजिटल रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य मिला है, लेकिन अभी तक केवल 3971 लोगों का ही रजिस्ट्रेशन पूरा हुआ है। बाकी रजिस्ट्रेशन जल्द से जल्द पूरा करने के लिए पंचायत स्तर पर शिविर लगाए जा रहे हैं।

डिजिटल रजिस्ट्रेशन क्यों जरूरी?

मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्रेशन कराने से कई फायदे होंगे:

  • सभी सरकारी योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, मत्स्य किसान समृद्धि योजना आदि) का लाभ सीधे खाते में आएगा।

  • डिजिटल पहचान पत्र से मछली पालकों की सही गिनती और उनकी जरूरतों का आकलन आसान होगा।

  • सब्सिडी, बीमा, ऋण और प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं पारदर्शी तरीके से मिलेंगी।

  • फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी और असली मछली पालकों को ज्यादा फायदा होगा।

  • डेटा के आधार पर भविष्य की योजनाएं बेहतर बनाई जा सकेंगी।

रजिस्ट्रेशन पूरी तरह निःशुल्क है। इसे कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से कराया जा सकता है। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक खाता और मोबाइल नंबर अनिवार्य है। आधार और मोबाइल का लिंक होना जरूरी है।

प्रखंड-वार रजिस्ट्रेशन की स्थिति

कैमूर जिले में प्रखंड-वार रजिस्ट्रेशन की संख्या इस प्रकार है (अभी तक):

  • अधौरा: 1,006

  • कुदरा: 455

  • भगवानपुर: 520

  • चांद: 246

  • रामपुर: 301

  • रामगढ़: 251

  • मोहनियां: 233

  • चैनपुर: 134

  • दुर्गावती: 102

  • नुआंव: 93

कुल रजिस्ट्रेशन: 3,971

लक्ष्य: 9,000

सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन अधौरा प्रखंड में हुआ है, जबकि सबसे कम नुआंव में। बाकी प्रखंडों में शिविर लगाकर लक्ष्य पूरा करने के प्रयास तेज किए गए हैं।

कैसे कराएं रजिस्ट्रेशन?

मत्स्य विभाग ने पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया है। इन शिविरों में CSC संचालक मौजूद रहते हैं। किसान अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल लेकर शिविर में पहुंच सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जिसे वे भविष्य में किसी भी योजना के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।

प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि योजना के तहत डिजिटल पहचान पत्र धारकों को संस्थागत वित्तीय सहायता भी मिलेगी। इससे मछली पालन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में इजाफा होगा।

Bihar News: मछली पालकों से अपील

मत्स्य प्रसार पदाधिकारी अभय गुप्ता ने सभी मछली पालकों और इससे जुड़े व्यवसायियों से अपील की है कि वे जल्द से जल्द रजिस्ट्रेशन करा लें। उन्होंने कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के कोई भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। शिविरों में लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश सभी कर्मचारियों को दिया गया है।

कैमूर जिले में मछली पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है। डिजिटल पहचान पत्र से इस क्षेत्र को नई गति मिलेगी। किसान अब घर के पास ही रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे और सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ उठा सकेंगे।

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