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Bihar News: राजगीर में चार लोगों की मौत का रहस्य खुला, 'फ्री फायर' के लिए पैसे मांगने पर मामा ने की थी भांजे की हत्या

बेंगलुरु के परिवार के चार सदस्य मृत मिले, एसआईटी ने खोले कई राज

Bihar News: राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला में बेंगलुरु के एक परिवार के चार सदस्यों की रहस्यमयी मौत के मामले में नालंदा पुलिस की विशेष जांच दल (एसआईटी) को कई चौंकाने वाली जानकारियां मिली हैं। छह फरवरी को धर्मशाला के कमरा नंबर छह-एबी में चार लोगों के शव फंदे से लटके मिले थे। अब जांच में पता चला है कि मृतक जीआर नागा प्रसाद ने इससे पहले अपने 14 वर्षीय भांजे की भी हत्या की थी। उस हत्या का कारण था मोबाइल गेम ‘फ्री फायर’ के लिए पैसों की मांग।

कौन थे मृतक

छह फरवरी को राजगीर में जिन चार लोगों के शव बरामद हुए, उनमें 50 वर्षीय जीआर नागा प्रसाद, उसकी 75 वर्षीय मां जीआर सुमंगला, 43 वर्षीय बहन श्रुथा और 48 वर्षीय बहन शिल्पा शामिल थे। सभी बेंगलुरु के निवासी थे। नागा कर्नाटक में निजी सुरक्षा गार्ड का काम करता था। यह परिवार नेपाल से भ्रमण करता हुआ 31 जनवरी को राजगीर पहुंचा था।

पुलिस ने बताया कि छह फरवरी को जब कमरे का दरवाजा लंबे समय तक बंद रहा और अंदर से कोई जवाब नहीं मिला, तो धर्मशाला प्रबंधन ने पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो चारों शव फंदे से लटके मिले।

भांजे की हत्या का कारण था ‘फ्री फायर’

जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि नागा ने चार अगस्त 2024 को कर्नाटक के कुंबरहल्ली के पाइपलाइन रोड स्थित विनायक नगर में अपने 14 वर्षीय भांजे अमोघ कीर्ति की निर्मम हत्या की थी। अमोघ नागा की बहन शिल्पा का पुत्र था।

पुलिस अभिरक्षा में नागा ने स्वीकार किया था कि अमोघ को मोबाइल गेम ‘फ्री फायर’ की बुरी लत लग गई थी। वह लगातार इस गेम को खेलने और इसमें खर्च करने के लिए पैसों की मांग करता रहता था। नागा इससे बेहद परेशान था। चार अगस्त को गुस्से में आकर उसने पहले अमोघ का गला घोंटा। फिर उसके हाथ-पैर बांधकर गला रेत दिया।

हत्या के बाद एक साल जेल में रहा

अमोघ की हत्या के बाद नागा ने वारदात में इस्तेमाल किए गए रसोई के चाकू को धो दिया। फिर उसने सामान बांधा और झील में कूदकर आत्महत्या करने का विचार बनाया, लेकिन बाद में मन बदल लिया। वह कर्नाटक से भागने के इरादे से बेंगलुरु के मैजेस्टिक बस अड्डे गया, लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे।

तीन दिन तक इधर-उधर भटकने के बाद नागा ने सात अगस्त 2024 को कर्नाटक के सोलादेवनाहल्ली थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। कर्नाटक पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब एक साल तक जेल में रहने के बाद नागा जमानत पर छूटा था।

मां और बहनों की भी हत्या की आशंका

राजगीर में मिले शवों की स्थिति से पुलिस को संदेह है कि नागा ने पहले अपनी मां और दोनों बहनों की हत्या की, फिर खुद फांसी लगा ली। तीनों महिलाओं के हाथ-पैर रस्सी से बंधे थे और मुंह पर लाल रंग की टेप चिपकी हुई थी।

जबकि नागा के मुंह पर टेप नहीं थी, लेकिन उसके हाथ बंधे हुए थे। पुलिस मान रही है कि नागा ने पहले तीनों महिलाओं का गला घोंटा या उन्हें मार डाला। फिर उसने अपने दोनों हाथ बांधे और कुर्सी पर खड़े होकर फंदे में गर्दन डाल दी और कूद गया।

हाथ बांधने की वजह क्या थी

राजगीर थानेदार रमन कुमार ने बताया कि पुलिस ने कर्नाटक पुलिस से नागा के आपराधिक इतिहास की विस्तृत जानकारी ली है। जांच में पता चला कि भांजे की हत्या के समय भी नागा ने हत्या के बाद आत्महत्या का विचार बनाया था, लेकिन फिर मन बदल लिया।

इस बार की परिस्थितियों के आधार पर पुलिस का मानना है कि नागा ने सोच-समझकर योजना बनाई थी। उसे डर था कि मां और बहनों की हत्या के बाद जब वह फंदे पर झूलने जाएगा, तो उसका इरादा डगमगा न जाए। इसलिए उसने पहले ही अपने दोनों हाथ बांध लिए ताकि बाद में फंदे से निकल न सके।

पिता से अलगाव के बाद मामा बना सहारा

जांच में पता चला कि शिल्पा का अपने बेटे अमोघ की हत्या से करीब 11 महीने पहले अपने पति से अलगाव हो गया था। वह अपने चाचा के घर चली गई थी। अमोघ को उसने नागा के पास भेज दिया था। शिल्पा को उम्मीद थी कि नागा बेटे के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाएगा और उसे मोबाइल गेम की लत से छुड़ाएगा। लेकिन परिणाम सोच के बिल्कुल विपरीत निकला।

अमोघ अपने मामा नागा के करीब हो गया था। लेकिन उसकी गेम की लत और पैसों की लगातार मांग ने नागा को इतना परेशान कर दिया कि उसने अपने ही भांजे की हत्या कर दी।

जेल से छूटने के बाद धार्मिक स्थलों का भ्रमण

एसआईटी ने जब कर्नाटक पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि जमानत पर छूटने के बाद नागा और उसका परिवार पड़ोसियों से भी बातचीत नहीं करता था। वे अधिकतर समय पूजा-पाठ में व्यस्त रहते थे। लगातार मंदिरों और धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहे थे।

पुलिस का मानना है कि नागा पश्चाताप की आग में जल रहा था। अपने भांजे की हत्या का अपराधबोध उसे लगातार सता रहा था। शायद इसी कारण से वह परिवार के साथ धार्मिक स्थलों का भ्रमण कर रहा था। नेपाल से राजगीर आना भी इसी धार्मिक यात्रा का हिस्सा था।

पहले से योजना बनाकर लाए थे सामान

नालंदा पुलिस ने राजगीर बाजार में छानबीन की तो पता चला कि नागा या उसके परिवार के किसी सदस्य ने कथित सामूहिक आत्महत्या में इस्तेमाल हुआ कोई भी सामान स्थानीय दुकानों से नहीं खरीदा था। रस्सी, टेप या अन्य कोई सामान राजगीर से नहीं लिया गया।

इससे पुलिस को संदेह है कि नागा पहले से ही योजना बनाकर आया था। वह यह सब सामान अपने साथ लेकर आया होगा। यह भी संभव है कि उसने रास्ते में कहीं और से यह सामान खरीदा हो।

Bihar News: एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

राजगीर थानेदार रमन कुमार ने बताया कि सामूहिक आत्महत्या या मां व बहनों की हत्या के बाद नागा द्वारा खुद को फांसी लगाना, दोनों ही संभावनाओं पर गहनता से छानबीन की जा रही है। अभी एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) और पोस्टमार्टम की रिपोर्ट नहीं आई है।

पुलिस इन रिपोर्टों के आने का इंतजार कर रही है। इनसे मौत का सही कारण और समय का पता चल सकेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि तीनों महिलाओं की मौत कैसे हुई और क्या वाकई नागा ने उनकी हत्या की थी।

यह मामला मोबाइल गेम की लत, पारिवारिक तनाव और अपराधबोध की एक दुखद कहानी बनकर सामने आया है। एसआईटी जांच को अंतिम रूप दे रही है।

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