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Bihar Politics: राज्यसभा में गूंजी पाटलिपुत्र की गूंज, उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलने की मांग उठाई

उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में पटना को पाटलिपुत्र नाम देने की मांग की, मौर्य काल के गौरव से जोड़कर कहा- इतिहास से जुड़ने का प्रतीक

Bihar Politics: राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठा। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग की। उन्होंने इसे सिर्फ नाम का बदलाव नहीं, बल्कि भारत के गौरवशाली अतीत से फिर जुड़ने का प्रतीक बताया।

उपेंद्र कुशवाहा ने सदन में कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में अतीत के महान योगदानों से प्रेरणा लेने की बात कही गई है। उन्होंने इसे भारत के उस सुनहरे दौर से जोड़ा, जब देश को दुनिया में ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था। उनका कहना था कि ऐसे विचार हमें उस समय की याद दिलाते हैं, जब भारत का सम्मान पूरे विश्व में था।

मौर्य काल में पाटलिपुत्र का वैश्विक महत्व

सांसद ने मौर्य साम्राज्य के समय का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस दौर में भारत की सीमाएं आज के बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान तक फैली हुई थीं। पाटलिपुत्र उस समय सत्ता, ज्ञान, संस्कृति और प्रशासन का वैश्विक केंद्र था। चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे महान शासकों की राजधानी होने के कारण यह शहर दुनिया भर में प्रसिद्ध था।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि हमारी जिम्मेदारी है कि इतिहास पर जमी धूल को हटाएं। आने वाली पीढ़ियों को हमारे गौरवशाली अतीत से जोड़ा जाए। पाटलिपुत्र नाम रखने से बिहार और पूरे देश की ऐतिहासिक पहचान मजबूत होगी।

अन्य शहरों के नाम बदले गए, पटना क्यों नहीं?

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में कई शहरों के नाम पहले ही बदले जा चुके हैं। जैसे:

  • कलकत्ता का नाम कोलकाता

  • उड़ीसा का नाम ओडिशा

  • बंबई का नाम मुंबई

इन बदलावों से उन जगहों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान मजबूत हुई। उपेंद्र कुशवाहा ने पूछा कि जब इतने शहरों के नाम बदले जा सकते हैं, तो पटना को पाटलिपुत्र क्यों नहीं किया जा सकता?

नाम बदलने की प्रक्रिया क्या है?

सदन में नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया भी बताई गई। शहर का नाम बदलने के लिए ये कदम उठाने पड़ते हैं:

  1. राज्य विधानसभा में प्रस्ताव पारित होना जरूरी।

  2. प्रस्ताव के बाद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय को भेजा जाता है।

  3. गृह मंत्रालय के अलावा रेल मंत्रालय, डाक विभाग और अन्य संबंधित विभागों से सहमति ली जाती है।

  4. सभी मंजूरियां मिलने के बाद केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करती है।

  5. अधिसूचना के बाद ही नाम आधिकारिक रूप से बदलता है।

उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार सरकार और केंद्र सरकार से अपील की कि इस दिशा में जल्द कदम उठाए जाएं।

Bihar Politics: राजनीतिक और सांस्कृतिक बहस तेज होने की उम्मीद

राज्यसभा में यह मुद्दा उठने के बाद पटना के नाम बदलाव को लेकर बहस फिर से शुरू हो गई है। समर्थक इसे ऐतिहासिक गौरव की वापसी मान रहे हैं। उनका कहना है कि पाटलिपुत्र नाम से बिहार की पहचान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक महत्व भी बढ़ेगा।

वहीं, कुछ लोग मानते हैं कि पटना नाम अब स्थित हो चुका है। नाम बदलने से दैनिक जीवन, दस्तावेज, व्यवसाय और प्रशासन में परेशानी हो सकती है। यह मुद्दा अब राजनीतिक दलों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। बिहार सरकार के रुख पर सभी की नजर टिकी हुई है। अगर विधानसभा में प्रस्ताव आता है, तो आगे की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

उपेंद्र कुशवाहा का यह बयान ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि अतीत की प्रेरणा से ही हम भविष्य की मजबूत नींव रख सकते हैं। पाटलिपुत्र नाम इसी दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है।

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