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Padma Shri 2026: खेत से राष्ट्रपति भवन तक, बिहार के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को मिला सम्मान

खेत से राष्ट्रपति भवन तक का सफर, मुजफ्फरपुर के डॉ. गोपालजी त्रिवेदी को पद्मश्री, लीची-मखाना-शीतकालीन मक्का में क्रांति

Padma Shri 2026: पद्म पुरस्कार 2026 की घोषणा के साथ बिहार के एक साधारण किसान परिवार के बेटे डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का नाम पद्मश्री सूची में शामिल हो गया है। यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि बिहार की कृषि क्रांति, वैज्ञानिक सोच और मिट्टी से जुड़े संघर्ष का सम्मान है। मुजफ्फरपुर के बंदरा प्रखंड के मतलुपुर गांव में जन्मे डॉ. त्रिवेदी ने लीची के बूढ़े बागानों को नई जान दी, जलजमाव वाले इलाकों में मखाना की खेती को बढ़ावा दिया और शीतकालीन मक्का को बिहार की पहचान बनाया।

खेत संभालने से पीएचडी और कुलपति तक का सफर

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ। पिता की असामयिक मृत्यु के बाद पढ़ाई छोड़कर खेत संभालने लगे। लेकिन मां की प्रेरणा और अपनी लगन से उन्होंने कृषि विज्ञान में पीएचडी पूरी की। शुरुआत में स्वतंत्रता सेनानी यमुना कार्जी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और एक साधारण पोस्टकार्ड पर कृषि विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन करवाया। यही पोस्टकार्ड उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

बाद में लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने मुशहरी क्षेत्र में किसानों की बदहाली देखकर डॉ. त्रिवेदी को इस समस्या का समाधान सौंपा। जेपी का मानना था कि सामाजिक बदलाव खेतों से शुरू होता है। डॉ. त्रिवेदी ने इसी सोच को आधार बनाकर अपना जीवन समर्पित कर दिया। प्रोफेसर से लेकर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति तक का सफर तय किया, लेकिन कभी मिट्टी से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा।

लीची बागानों में क्रांति

मुजफ्फरपुर की लीची विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन पुराने बागान बंजर हो रहे थे। डॉ. त्रिवेदी ने Rejuvenation Canopy Management तकनीक विकसित की।

इस तकनीक से बूढ़े पेड़ों को फिर से फलदार बनाया गया। हजारों किसानों की आय बढ़ी और मुजफ्फरपुर की लीची को नई पहचान मिली। आज यह तकनीक बिहार के लीची बागवानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

जलजमाव वाले इलाकों में मखाना की खेती

उत्तर बिहार के कई इलाके साल भर जलजमाव से ग्रस्त रहते हैं। जहां पानी अभिशाप था, वहां डॉ. त्रिवेदी ने मखाना और सिंघाड़े की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा दिया। उन्होंने किसानों को नई तकनीक सिखाई, बीज उपलब्ध कराया और बाजार से जोड़ा। आज बिहार मखाना उत्पादन में देश का सबसे बड़ा राज्य है।

शीतकालीन मक्का ने बदली तस्वीर

बिहार में मक्का की खेती पहले सीमित थी। डॉ. त्रिवेदी ने शीतकालीन मक्का (Winter Maize) को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से बिहार मक्का उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया। यह बदलाव सिर्फ फसल का नहीं, बल्कि खेती की सोच का था।

आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम

डॉ. त्रिवेदी सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि गहरी आस्था वाले व्यक्ति भी हैं। वे अपने पैतृक गांव मतलुपुर के मृदलुपुर शिव मंदिर में हर महीने विधिवत रुद्राभिषेक कराते हैं। पूजा में अपने पेड़ के बेलपत्र का इस्तेमाल करते हैं। खेती के नए प्रयोग शुरू करने से पहले वे शिव आराधना को शुभ मानते थे।

Padma Shri 2026: सम्मान से ज्यादा मिट्टी से जुड़ाव

उच्च पदों पर रहने के बावजूद डॉ. त्रिवेदी का रिश्ता खेतों से कभी नहीं टूटा। रिटायरमेंट के बाद भी वे किसानों को नई तकनीक सिखाने में जुटे हैं। पद्मश्री सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से ज्यादा बिहार की कृषि आत्मा का सम्मान है। यह उन हजारों किसानों का सम्मान है, जिन्होंने मिट्टी से जुड़कर राष्ट्र को मजबूत किया।

डॉ. गोपालजी त्रिवेदी की कहानी संघर्ष, लगन और मिट्टी के प्रति प्रेम की मिसाल है। खेत से राष्ट्रपति भवन तक का सफर बिहार के लिए गर्व का विषय है। यह सम्मान न सिर्फ एक व्यक्ति का, बल्कि बिहार की कृषि क्रांति का सम्मान है।

 

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