Gorakhpur-Siliguri Expressway: गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे के लिए पश्चिम चंपारण में 187 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण, निर्माण प्रक्रिया तेज
पश्चिम चंपारण में 187 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण; बिहार के 8 जिलों से गुजरेगा 550 किमी छह लेन हाईवे
Gorakhpur-Siliguri Expressway: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे परियोजना तेजी पकड़ रही है। पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया और नौतन प्रखंडों में भू-अर्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दोनों प्रखंडों में कुल 187.23 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जाएगी। यह छह लेन का एक्सप्रेसवे बिहार के 8 जिलों से गुजरेगा। इससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और आर्थिक विकास को बल मिलेगा।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
यह एक्सप्रेसवे कुल 550 किलोमीटर लंबा होगा। निर्माण लागत करीब 37,500 करोड़ रुपये है। बिहार के इन जिलों से गुजरेगा
- पश्चिम चंपारण
- पूर्वी चंपारण
- शिवहर
- सीतामढ़ी
- मधुबनी
- सुपौल
- अररिया
- किशनगंज
परियोजना से 39 प्रखंड और 313 गांव जुड़ेंगे। कोई बड़ा टर्मिनल नहीं बनेगा।
पश्चिम चंपारण में भू-अर्जन
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि बैरिया और नौतन प्रखंडों में 187.23 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। थ्री ए के तहत एलाइनमेंट की अधिघोषणा हो चुकी है। दोनों प्रखंडों में 7-7 मौजों को चिह्नित किया गया है। खेसरा चिह्नित करने का काम शुरू हो गया है।
अधिकारी ने कहा कि इस एक्सप्रेसवे से जिले के सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में बड़ा बदलाव आएगा।
Gorakhpur-Siliguri Expressway: परियोजना का महत्व
यह एक्सप्रेसवे उत्तर बिहार को पूर्वोत्तर भारत से जोड़ेगा। यात्रा समय कम होगा। व्यापार और पर्यटन बढ़ेगा। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
पश्चिम चंपारण के लोग इस परियोजना से खुश हैं। वे कह रहे हैं कि विकास को नई गति मिलेगी।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे बिहार के लिए महत्वपूर्ण है। पश्चिम चंपारण में भू-अर्जन शुरू होने से काम तेज होगा। उम्मीद है कि परियोजना समय पर पूरी हो। क्षेत्र का विकास हो।



