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MGNREGA का नाम बदला,  'पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना' बनी, ग्रामीणों को मिलेगा फायदा

कैबिनेट ने मनरेगा का नाम बदला और रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए; 2026 से लागू।

MGNREGA: मोदी सरकार ने ग्रामीण रोजगार की प्रमुख योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदल दिया है। अब यह ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ के नाम से जानी जाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2025 को इस नाम परिवर्तन के साथ-साथ योजना के लाभों में भी बढ़ोतरी को मंजूरी दी। यह बदलाव ग्रामीण परिवारों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। योजना की शुरुआत 2005 में यूपीए-1 सरकार ने की थी, जो ग्रामीण क्षेत्रों में 100 दिनों का गारंटीड रोजगार देती थी। 2009 में इसे महात्मा गांधी के नाम से जोड़ा गया। अब 15 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को नई सुविधाएं मिलेंगी। छोटे शहरों और गांवों के मजदूर जो इस योजना पर निर्भर हैं, उनके लिए यह कदम राहत वाला साबित होगा।

नाम परिवर्तन का मतलब: बापू को श्रद्धांजलि, योजना की पहचान मजबूत

कैबिनेट के फैसले के अनुसार, मनरेगा का नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ रखा गया है। यह परिवर्तन महात्मा गांधी की ग्रामीण विकास और स्वावलंबन की विचारधारा को सम्मान देने का प्रयास है। योजना का मूल उद्देश्य वही रहेगा—ग्रामीण परिवारों को सालाना 100 दिनों का मजदूरी गारंटी देना। लेकिन नाम बदलाव से इसे अधिक सांस्कृतिक और प्रेरणादायक पहचान मिलेगी। सरकार का कहना है कि इससे योजना की पहुंच बढ़ेगी और ग्रामीणों में उत्साह आएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव योजना को गांधीवादी मूल्यों से जोड़कर मजबूत करेगा।

रोजगार के दिन बढ़े: 100 से 125 दिन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

सबसे बड़ा बदलाव रोजगार के दिनों में है। पहले 100 दिनों से बढ़ाकर अब 125 दिनों का गारंटी मिलेगा। यानी हर ग्रामीण परिवार को सालाना 25 अतिरिक्त दिनों की मजदूरी का अधिकार होगा। इससे ग्रामीणों की आय में इजाफा होगा और मौसमी बेरोजगारी कम होगी। योजना में महिलाओं का हिस्सा एक-तिहाई है, जो लैंगिक समानता को बढ़ावा देगा। लाभार्थी सूची में 15 करोड़ से ज्यादा लोग शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण विकास को गति देना है। यह बदलाव 2026 से लागू होगा।

ग्रामीणों के लिए फायदे: आय बढ़ेगी, विकास तेज होगा

नए नाम और बढ़े दिनों से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी। अतिरिक्त 25 दिनों की मजदूरी से सालाना आय 5000-7000 रुपये बढ़ सकती है। योजना से ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण भी तेज होगा। छोटे किसानों और मजदूरों को मौसमी जोखिमों से बचाव मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने का कदम है। लाभार्थी जागरूक रहें और पंचायतों से संपर्क करें। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनेगी।

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