बिहार:Women and Child Development Corporation द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने रखी है। राज्य की महिला हेल्पलाइन 181 पर इस अवधि में कुल 69,101 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 58,596 मामलों का समाधान किया जा चुका है।
इन शिकायतों में घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, साइबर अपराध, मानसिक प्रताड़ना और पारिवारिक विवाद जैसे मामले प्रमुख रहे। खास तौर पर महिलाओं की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने, फर्जी प्रोफाइल बनाने और ऑनलाइन धमकी देने के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पटना में सबसे अधिक शिकायतें, फोटो वायरल के मामलों ने बढ़ाई चिंता
Patna राज्य का सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा, जहां महिला हेल्पलाइन पर 6,928 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से 5,995 मामलों का निपटारा किया जा चुका है।
अधिकारियों के अनुसार राजधानी में साइबर उत्पीड़न, महिलाओं की तस्वीरों का दुरुपयोग और सोशल मीडिया पर बदनाम करने की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। यह दर्शाता है कि तकनीक का गलत इस्तेमाल महिलाओं के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
गया, बेगूसराय और अन्य जिलों की स्थिति
- Gaya: 4,036 शिकायतें, 2,620 मामलों का समाधान
- Begusarai: 2,950 शिकायतें, 1,793 मामलों का निपटारा
इसके अलावा Purnia, Saran, Gopalganj और Kishanganj में भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया।
भागलपुर बना मिसाल
Bhagalpur ने शिकायतों के निपटारे में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। यहां 2,880 शिकायतों में से 2,832 मामलों का समाधान किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि त्वरित कार्रवाई, प्रभावी काउंसलिंग और विभागों के बीच बेहतर समन्वय इस सफलता की मुख्य वजह रहे।
जहानाबाद में लंबित मामलों पर समीक्षा
Jehanabad में स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही। यहां 2,293 शिकायतों में से केवल 964 मामलों का निपटारा हो सका। लंबित मामलों को देखते हुए विभाग ने विशेष समीक्षा शुरू की है।
हेल्पलाइन 181 दे रही कानूनी और मानसिक सहायता
महिला हेल्पलाइन 181 राज्यभर में संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी सहायता, काउंसलिंग और तत्काल सहयोग उपलब्ध करा रही है। बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान भी तेज किए जा रहे हैं।
समाज के लिए एक बड़ा सवाल
69 हजार से अधिक शिकायतें इस बात का संकेत हैं कि बिहार की हजारों महिलाएं अब भी हिंसा, भय और उत्पीड़न का सामना कर रही हैं। राहत की बात यह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं आगे आकर अपनी आवाज उठा रही हैं।
लेकिन सवाल अब भी कायम है—क्या हमारी बेटियां घर से लेकर इंटरनेट तक कहीं भी पूरी तरह सुरक्षित हैं?




